सतना। रीवा के बाद अब सतना जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। मैहर जिले के खरमसेड़ा निवासी 20 वर्षीय दीपांजलि साकेत और उनके नवजात शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जच्चा-बच्चा दोनों के पोस्टमार्टम की मांग की है।
इंजेक्शन लगने के मात्र 10 मिनट बाद मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपांजलि की शादी दो वर्ष पूर्व शिवा साकेत से हुई थी। प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें पहले मैहर में भर्ती कराया गया था, जहां चार दिन इलाज चलने के बाद हालत बिगड़ने पर 16 सितंबर की रात सतना जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का दावा है कि अस्पताल में देर रात दीपांजलि को एक इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन लगने के मात्र 10 मिनट बाद ही उन्हें तेज घबराहट हुई और अचानक हालत बिगड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। इस दौरान गर्भ में ही बच्चे ने भी दम तोड़ दिया, जिसे बाद में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर बाहर निकाला।
जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया
परिवार का आरोप है कि प्रसव के समय मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ चिकित्सक ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं और पूरा काम जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया गया था। डॉक्टरों द्वारा भोजन से तबीयत बिगड़ने की बात कहे जाने पर परिजनों ने ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि दीपांजलि ने घर पर सभी सदस्यों के साथ सामान्य रोटी-सब्जी खाई थी और बाकी किसी को कोई समस्या नहीं हुई।
अस्पताल प्रबंधन ने चुप्पी साधी
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम की मांग की है ताकि मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सके। वहीं, दूसरी ओर इस संवेदनशील मामले पर अस्पताल प्रबंधन ने चुप्पी साध रखी है और मीडिया से दूरी बना ली है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि मौत की असली वजह क्या थी।