जीरन। नगर परिषद जीरन के सम्मेलन के बाद बुधवार को पाइपलाइन कार्य की गुणवत्ता और ठेकेदार के बकाया भुगतान को लेकर जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के कक्ष में पहुंचकर सवाल उठाए। पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष मधुसूदन राजोरा एवं पार्षद प्रतिनिधियों ने पाइपलाइन की कम गहराई में बिछाने और ठेकेदार को भुगतान किए जाने को लेकर आपत्ति जताई।
पाइपलाइन की गुणवत्ता पर उठे सवाल-
जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नगर में बिछाई जा रही पाइपलाइन निर्धारित मानकों के अनुरूप पर्याप्त गहराई में नहीं डाली जा रही है। उनका कहना था कि कम गहराई में पाइपलाइन बिछाने से भविष्य में इसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
ठेकेदार के भुगतान को लेकर उठाए सवाल-
पूर्व मंडल अध्यक्ष मधुसूदन राजोरा ने कहा कि करीब एक वर्ष पहले फिल्टर प्लांट एवं पाइपलाइन कार्य करने वाले ठेकेदार विजय प्लास्टिक के बकाया भुगतान का प्रस्ताव परिषद के समक्ष आया था। उनके अनुसार, परिषद ने उस समय प्रस्ताव को अस्वीकार कर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय लिया था।
राजोरा ने सवाल उठाया कि परिषद द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद ठेकेदार के भुगतान का प्रस्ताव दोबारा प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल (पीआईसी) के समक्ष किस आधार पर लाया गया और भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।
पीआईसी सदस्यों ने भी रखी अपनी बात-
बैठक के दौरान कुछ पीआईसी सदस्यों ने कहा कि उनके स्तर पर ठेकेदार के भुगतान के प्रस्ताव को खारिज किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बाद प्रस्ताव किस स्तर पर स्वीकृत हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
मामले में CMO ने कहा कि यदि पूर्व में प्रस्ताव खारिज किया गया था और इसके बावजूद भुगतान हुआ है तो संबंधित पीआईसी सदस्य इस संबंध में लिखित जानकारी दें, ताकि मामले की जांच की जा सके।
पाइपलाइन कार्य की गुणवत्ता और ठेकेदार के भुगतान को लेकर उठे सवालों के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है। अब मामले में संबंधित दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।