देवास। आज 11 अक्टूबर (रविवार) से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे है। नवरात्र को लेकर मंदिरों में विशेष साज-सज्जा के साथ तैयारियां की गई है। पहले दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की क्रमशः पूजा अर्चना होगी। इसका समापन 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को विजयादशमी (दशहरा) के साथ होगा। आइए शारदीय नवरात्रि के इस अवसर पर हम आपको मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के बारे में बताएंगे।
तीन स्वरूपों में भक्तों को देती है दर्शन
मध्य प्रदेश के देवास में देवी का अनोखा धाम है। यहां 300 फीट ऊंची चोटी पर मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा विराजित हैं। मां तुलजा भवानी को ‘बड़ी माता’ और मां चामुंडा को ‘छोटी माता’ कहा जाता है। देवास की यह प्रसिद्ध टेकरी केवल आस्था ही नहीं, बल्कि साधना और कला का भी केंद्र है।
देवास की प्रसिद्ध टेकरी पर स्थित मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूल बंगले से सजाया गया। ब्रह्म मुहूर्त में हुई माता की आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। मान्यता है कि मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा दिन में तीन स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देती हैं। नवरात्रि के पहले दिन माता का विशेष श्रृंगार किया गया।
उज्जैन के राजा ने की थी तपस्या
विश्वविख्यात देवास स्थित माता चामुंडा, माता तुलजा भवानी का रक्तबीज स्थल माता के उन शक्तिपीठ में से एक है जो अनादिकाल से यहां स्थित है। माता चामुंडा जहां पर उज्जैन के राजा भर्तहरि ने कभी तपस्या की थी। शूरवीर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के सेनापति वरदाई ने अपने जीवन के आखिरी साल यहीं बिताए थे। बताया जाता है कि दिनभर में माता चामुंडा यहां तीन रूप बदलती है।
मां के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं भक्त
शारदीय नवरात्री में यहां लाखों दर्शनार्थियों पहुंचते है। बड़ी माता तुलजा भवानी व विशाल स्वरूप में छोटी माता चामुंडा के दर्शन करने मात्र से यहां मनोकामनाएं पूरी होती है। जो माता भक्तों की आराधना का केंद्र बिंदु है। वहीं दूर-दूर से भक्त चौत्र नवरात्रि में मां के दर्शन करने के लिए देवास में माता के दरबार में आते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने पर हलवा पुरी का भोग लगाते हैं। श्रद्धालु सीढ़ी मार्ग से पैदल ‘जय माता दी’ के नारे लगाते मां के दरबार तक पहुंचते हैं और भक्तिमय हो जाते हैं।
माता टेकरी पर गिरे थे माता सती के रक्त बीज
मान्यता है कि माता सती के रक्त बीज देवास की माता टेकरी पर भी गिरे हैं और उन जगहों पर बड़ी माता तुलजा भवानी और छोटी माता चामुंडा भवानी विराजमान है। पिछले 300 सालों से नाथ सम्प्रदाय के पुजारी दोनों माता की पूजा-अर्चना, श्रृंगार करते आ रहे हैं।
शारदीय नवरात्रि पर व्यापक तैयारियां
शारदीय नवरात्रि को देखते हुए जिला प्रशासन ने माताजी टेकरी पर व्यापक तौर पर व्यवस्था/तैयारियां की हैं। टेकरी परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा ना हो, इसे लेकर पूरी व्यवस्थाएं की गई है। बड़ी माता और छोटी माता मंदिर परिसर में सुगमता से दर्शन के लिए अच्छे से प्रबंधन किया गया है।