माउंट आबू। पर्यटन नगरी माउंट आबू में शारदीय नवरात्र महोत्सव की धूम देखने को मिल रही है। प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां अर्बुदा देवी के दरबार में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के कोने-कोने से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। यह 15 दिवसीय धार्मिक महोत्सव शरद पूर्णिमा तक चलेगा।
300 सीढ़ियां चढ़कर मां के दरबार पहुंच रहे भक्त
मां अर्बुदा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था ऐसी है कि मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 300 सीढ़ियों की चढ़ाई भी भक्तों के उत्साह को कम नहीं कर पा रही है। सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। धार्मिक मान्यता है कि माउंट आबू की पावन धरती पर 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है।
मां सती के 52 शक्तिपीठों में विशेष स्थान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां अर्बुदा धाम का संबंध माता सती के 52 शक्तिपीठों से है। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती के अधर यानी होंठ गिरे थे। मां अर्बुदा के नाम पर ही इस पर्वत को अर्बुदा पर्वत कहा गया, जो कालांतर में माउंट आबू के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अर्बुदांचल के नाम से पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र की धार्मिक पहचान आज भी मां अर्बुदा से जुड़ी हुई है।
वास्कली राक्षस के वध से जुड़ी है पौराणिक कथा
मां अर्बुदा धाम से एक प्राचीन कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, देवताओं के आह्वान पर माता ने वास्कली नामक राक्षस का वध किया था। कथा के मुताबिक, राक्षस ने माता से अपने चरण उसके ऊपर रखने का वरदान मांगा था, जिसके बाद माता ने उसे अपने पैरों से दबा दिया। मंदिर के नीचे स्थित एक स्थान को इसी पौराणिक प्रसंग से जोड़कर देखा जाता है, जहां माता के चरणों के निशान होने की मान्यता है।
शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां अर्बुदा का यह पावन धाम श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अनूठा संगम बना हुआ है। दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु माता के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।