नीमच। शहर की प्रमुख बंगला-बगीचा समस्या समाधान के बाद भी उलझी हुई है। भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस समस्या के समाधान को नियमों के जाल में ऐसा उलझाया कि समस्या आज भी यथावत बनी हुई है।
वर्ष 2017 में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने जो समस्या का समाधान कर नागरिकों की सुनवाई के लिए व्यवस्थापन बोर्ड का गठन किया था। उस व्यवस्थापन बोर्ड तक महज 1 हजार 970 आवेदन ही पहुंच पाए हैं। इनमें से सिर्फ 691 प्रकरणों का ही निराकरण हो पाया है। शेष आवेदकों के प्रकरण अब भी लंबित है। जबकि उक्त बोर्ड के माध्यम से करीब 16 हजार आवेदकों की भूमि व भूखंडों का व्यवस्थापन किया जाना था। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों ने जनता को नियमों के जाल में ऐसा उलझाया कि लोग व्यवस्थापन के लिए आवेदन ही जमा नहीं करा रहे हैं।
बंगला-बगीचा क्षेत्र में निवासरत नागरिकों का कहना है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपने फायदे के लिए समस्या को उलझा रखा है। 2017 में पारित मसौदे में सरकार ने बंगला-बगीचा क्षेत्रों में निवासरत भूमि व भूखंडों के मालिकों को किरायेदार बनाने की तैयारी की है। जनप्रतिनिधि व सरकार भी इस समस्या का उचित समाधान नहीं करना चाहते हैं। इसीलिए सरकार ने समस्या का शत-प्रतिशत निराकरण ही नहीं किया है। नपा में काबिज भाजपा का बोर्ड भी अपना चुनावी वादा भूल चुका है।
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बंगला-बगीचा क्षेत्र में निवासरतों की परेशानी-
‘शहर में बंगला-बगीचा समस्या का जन्म 1980 के दशक में हुआ था। तब से ही समस्या चली आ रही थी। प्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्ष 2017 में समस्या का समाधान किया। इसके बाद व्यवस्थापन बोर्ड का गठन कर नागरिकों की समस्याओं को सुनने का क्रम शुरू हुआ। इन क्षेत्रों में निवासरत लोगों से आवेदन मंगाए गए। लेकिन व्यवस्थापन के जटिल नियम जनता को समझ नहीं आ रहे हैं। यहीं कारण है कि चार साल की अवधि में महज दो हजार आवेदन ही बोर्ड तक पहंच सके हैं। सरकार ने बंगलावासियों को स्वयं की भूमि पर किरायेदार बनाने की तैयारी की है। कई तरह के टैक्स नियमों का जाल बुनकर जनता पर थोपे जा रहे हैं। यह समस्या का समाधान नहीं। - राधेश्याम प्रजापति, बंगलावासी
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‘बंगला-बगीचा क्षेत्र में निवासरत कई नागरिक मध्यम व गरीब तबके हैं। इनके पास कहने को सिर्फ मकान है। अब ऐसे लोग भूमि व भूखंडों के व्यवस्थापन के लिए इतनी बड़ी रकम कहां से लाएंगे। सरकार ने मसौदा पारित कर राहत नहीं आफत दी है। नागरिकों के सामने समस्या के समाधान के बाद से ही ये नई चिंता खड़ी हो गई है। क्षेत्र का प्रत्येक व्यक्ति यह चाहता है कि समस्या का समाधान हो। लेकिन सरकार को भी नियमों में बदलाव कर जनता के हित में फैसला लेना चाहिए। सरकार ने जनता को नहीं, राजस्व को ध्यान में रख समस्या का समाधान किया है। - पुनीत सिंह, बंगलावासी