नीमच। विवाह में आ रही बाधाओं के निवारण और शीघ्र शुभ विवाह की कामना के साथ बुधवार को नीमच एक अनूठे धार्मिक आयोजन का साक्षी बना। भड़ली नवमी के अबूझ शुभ मुहूर्त पर शहर में पहली बार आयोजित सामूहिक अर्क विवाह धार्मिक अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री परशुराम महादेव मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे विवाह योग्य युवकों ने विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन कर अपनी धार्मिक आस्था का परिचय दिया।
विद्वान आचार्यों के सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में दो दर्जन से अधिक पंजीकृत युवकों का आक (अर्क) वृक्ष के साथ शास्त्रोक्त विधि से प्रतीकात्मक विवाह संस्कार संपन्न कराया गया। वैदिक रीति-रिवाजों के अनुरूप सम्पन्न हुए इस आयोजन में मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा।
कार्यक्रम के आचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित लक्ष्मण शास्त्री एवं ज्योतिषाचार्य पंडित जयप्रकाश शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में वर्णित यह प्राचीन धार्मिक विधान विवाह में आने वाली बाधाओं के निवारण तथा युवाओं के जीवन में शीघ्र शुभ विवाह के योग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जाता है। शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में अर्क विवाह का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।
आयोजन के माध्यम से सनातन संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं धार्मिक संस्कारों के संरक्षण का प्रभावशाली संदेश भी दिया गया। पहली बार आयोजित इस सामूहिक अनुष्ठान ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि युवाओं और समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।