मंदसौर। आज संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियो द्वारा झाड़ू लगाकर सरकार/शासन/प्रशासन संकेत दिया की, इस संविदा रूपी कचरे की सफाई कर नियमितीकरण की सुंदर, सुव्यवस्थित व्यवस्था लागू की जाए, समस्त संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर होने के बाद भी अपने जिला चिकित्सालय की सफ़ाई कर, अपने कर्तव्य के प्रति जागरूकता को दर्शाया।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मन्दसौर की जिलाध्यक्ष डॉ प्रतिज्ञा पाटीदार ने बताया कि हम समस्त संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला मंदसौर राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के मार्ग (अहिंसा के मार्ग) पर चलकर हम लोग अपनी बात रख रहे है, तब भी हमारे साथ अन्याय पूर्ण आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है, जो की कदाचित उचित नहीं है। सरकार/शासन/प्रशासन बात करने को तैयार नहीं है।
15 दिसम्बर 2022 से अनिश्चित कालीन हड़ताल 12 वें दिन भी जारी है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ द्वारा मुख्यमंत्री द्वारा 5 जून 2018 में सरकार (सामान्य प्रशासन विभाग) ने संविदा नीति घोषित की थी जिसमें साफ कहा था कि संविदा कर्मचारियों को रिक्त पदों पर नियमित किया जाएगा और जो नियमित नहीं किए जा सकेंगे उन्हें नियमित के समकक्ष 90 प्रतिशत वेतन दिया जाएगा। अपनी इस मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे कर्मचारी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में है। लेकिन मुक्यमंत्री ने आज तक नही सोचा की इतने कम वेतन हम अपने परिवार को पालने में सक्षम नहीं है, इतने वेतन में परिवार की पालना, बच्चों को पढ़ाना, घर पर बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य हेतु राशन ओर सभी जरुरते, ये सब होना संभव नहीं है, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अपने नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदेश भर में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार हमारे साथ जो दोहरा व्यवहार कर रही है जो की कदाचित उचित नहीं है, अगर सरकार हमारे साथ वेतन देने में दोहरा व्यवहार कर रही है तो, परिवार के लिए आवश्यक हर सामग्री में भी दोहरा व्यवहार करके आधी दरों पर सामग्री मुहैया कराए, जिससे हम लोग, कम वेतन पर अपना परिवार पाल सके।
जब भी प्रदेश में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी आपदा आई है, भले ही वह कोरोना वायरस से पहले दूसरी तमाम महामारी हो, हम सरकार के साथ हरदम हर कदम पर खड़े नजर आए। कई कर्मचारी ऐसे हैं जो गत 20 सालों से अनियमित कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह न तो सुविधा मिल रही है और ना ही संसाधन मुहैया हो पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब है। धूप, ठंड, गर्मी, बारिश, कितनी भी दूरी हो स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी कर्तव्य निष्ठा के साथ हर मोर्चे पर अडिग हैं ।
हमारे साथियों ने कोरोना काल के दौरान भी अपनी जान हथेली पर रखकर लगातार स्वास्थ्य सेवाऐ दी है जिसमें अपने कई साथियों को भी खोया है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने ही अपने ट्वीट के माध्यम से संविदा व्यवस्था को अन्याय पूर्ण माना है संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मुख्यमंत्री मांग करता है कि अपना संकल्प पूर्ण करें।
सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक-सी-5-2/2018/1/1/3, 5 जून 2018 की नीति लागू कर, एनएचएम सपोर्ट स्टाफ को आउट सोर्सिग से हटाकर तत्काल एनएचएम में वापस लिया जाए तथा बी मॉक लेखापाल, मलेरिया एमपी डब्ल्यू व अप्रेजल से निष्काशित कर्मचारियों को तत्काल एनएचएम में वापस लिये जाने संबंधित आदेश प्रदान करे।