खरगोन। कलेक्टर कुमार पुरूषोत्तम की अध्यक्षता में जिले के सभी अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावासों के अधीक्षकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर कुमार ने अधीक्षकों से आश्रमों में रहने वाले बालक-बालिकाओं की रूटिंग के बारे में जाना। साथ ही आश्रमों में रहने वाले बच्चों के खाने का मैन्यू, पढ़ाई का समय, खेलने का समय सहित अन्य विषयों की जानकारी ली। उन्होंने ने कहा कि आश्रमों में रहने वाले बच्चों को आप अपने बच्चों की तरह ही रखे और पढ़ाई कराये ताकि उनकी नींव शुरू से ही मजबूत बनी रहे। जिले के सभी छात्रावासों एवं आश्रमों में कोई भी बच्चा फेल नहीं होना चाहिये। इसलिये इन बच्चों की पढाई का स्तर सुधार करना होगा। जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जावे। जो इन छात्रावासों एवं आश्रमों में शैक्षणिक स्तर में किस प्रकार से सुधार किया जावे इस पर अपने सुझाव लिखित में प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि आश्रमों में बच्चों का 3 घण्टे तक का समय तक कर पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराए। उन्होंने कहा कि छात्रवास और आश्रमों में रहने वालें बच्चों का पढ़ाई के मामले में शैक्षणिक स्तर ठीक होना चाहिए। साथ ही कलेक्टर कुमार ने आश्रम अधीक्षकों से बच्चों के छूट़्टी जाने की, बच्चों की दर्ज संख्या की प्रक्रिया भी जानी। जिले के संचालित सभी छात्रावासों एवं आश्रमों के लिये एक प्रतिदिन की दिन चर्या का निर्धारण किया जाए। जिसमें प्रातः उठने से लेकर, पीटी, ब्रेकफास्ट, खेलकुद गतिविधियां, पढाई का समय, स्कूल का समय, योग करने का समय, दोपहर का भोजन, शाम का भोजन का समय निर्धारित किया जाकर सभी छात्रावासों एवं आश्रमों में इसका पालन करांए। इसी प्रकार जिले के संचालित सभी छात्रावासों एवं आश्रमों में ब्रेकफास्ट एवं भोजन का एक स्टेण्डर्ड मेनू निर्धारित किया जावे। इसके लिए 5 अधीक्षकों की एक टीम बनाकर इसका निर्धारण किया जावे। बच्चों को सभी प्रकार का पोष्टिक खाना इस मेनू में निर्धारित किया जाए। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी हेमेन्द्र वरणेकर, डीपीसी शैलेन्द्र कानूड़े, सहायक संचालक एबी गुप्ता, आश्रम अधीक्षक सहित अन्य उपस्थित रहे।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले आश्रम होंगे पुरस्कृत-
बैठक में कलेक्टर कुमान ने कहा कि छात्रावासों एवं आश्रमों में एक त्रैमासिक श्रेणीकरण की व्यवस्था की जाए। जिसमें जिला स्तर से एक टीम बनाकर इनका निरीक्षण कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। श्रेणीकरण के लिए 10 पैरामीटर निर्धारित किये जाएं। इन पैरामीटर में संस्था की साफ-सफाई, वाशरूम, कीचन, बिस्तर, पीने का पानी, किचन गार्डन, प्रदाय भोजन की गुणवत्ता, नवाचार को शामिल किया जाए। जिला स्तरीय गठित समिति त्रेमासिक निरीक्षण कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। जिससे जिले में संचालित छात्रावासों एवं आश्रमों का श्रेणीकरण किया जा सकेगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय छात्रावास/ आश्रम अधीक्षकों को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।