नीमच। नगर पालिका नीमच भूमि घोटाले की जद में है। लगभग 100 करोड़ से अधिक रुपयों के भूमि घोटाले में नपा सभापति मनोहर मोटवानी की संलिप्तता सामने आ रही है। नीमच के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र दशपुर एक्सप्रेस ने आज इस घोटाले को लेकर मुख्य पृष्ठ पर समाचार प्रकाशित किया है। जिसके तहत फर्जी तरीके से नपा सभापति मोटवानी ने अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाते हुए जमीन का आवंटन किया गया है।
समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार नपा ने 16 सितंबर 1951 को सिंधी शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए पुनर्वास विभाग को 2 लाख 64 हजार वर्गफुट भूमि उपलब्ध कराई थी। जिसके बाद 26 जून 2007 को सिंधी कॉलोनी में शेष पुनर्वास की करीब 17 हजार वर्गफुट भूमि मंदसौर निवासी शंकरलाल पिता प्रेमचंद चंदानी को भूमि समायोजन के नाम पर आवंटित कर दी गई, जिसका तत्कालीन नपा परिषद ने विरोध किया था और 29 जनवरी 2008 को परिषद में संकल्प पारित कर आवंटित भूमि का आवंटन निरस्त किया गया था। साथ ही हाईकोर्ट में याचिका लगाने का निर्णय लिया गया था। तब मनोहर मोटवानी भी उस परिषद में पार्षद थे और शंकरलाल चंदानी को आवंटित सिंधी कॉलोनी भूमि का विरोध करने वालों में सबसे आगे थे।
दशपुर एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 17 नवंबर 2008 को यथास्थिति का आदेश दिया था, तब से मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। लेकिन नपा में नई परिषद का गठन होने के बाद सुनियोजित तरीके से परिषद में नपा संपत्ति संबंधित प्रकरणों को अधिवक्ता बदलने का अधिकार नपाध्यक्ष व सीएमओ को देने का प्रस्ताव पारित करा लिया। जिसके बाद अधिवक्ता बदलने का सारा खेल शुरू हो गया, जिसके लिए बहाने भी तैयार रखे गए।
समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार पुनर्वास की शेष बची भूमि को शंकरलाल चंदानी को देने का विरोध सिंधी समाज ने भी किया था और आपत्ति दर्ज करवाई थी। लेकिन सबसे बड़ी रोचक बात यह सामने आई कि सबसे ज्यादा विरोध करने वाले नपा सभापति मनोहर मोटवानी ने अपने रिश्तेदारों के नाम भूमि का सौदा कर, भूमि के 9 भागों में टुकड़े कर 15 मई 2014 को भूमि की रजिस्ट्री करा दी। इस पूरे खेल में नपा सभापति मनोहर मोटवानी ने मास्टरमाइंड के रूप में खेल किया। हाईकोर्ट के यथास्थिति के आदेश के बाद भी मोटवानी ने अपने भाइयों और रिश्तेदारों के नाम जमीन की रजिस्ट्री करवा दी। दोबारा पार्षद और सभापति बनने के बाद मोटवानी ने सबसे पहले विवाद को ख़त्म करने के लिए योजना बनाकर प्रकरण में अधिवक्ता को बदल दिया। यह भूमि घोटाला लगभग 100 करोड़ से भी ज्यादा का है।
वहीं इस घटना के बाद अब शहर में चर्चा चल रही है कि कालिदास शिक्षण समिति के जीवाजी राव सिंधिया छात्रावास की 4 लाख 32 हजार वर्ग फ़ीट जमीन जिसका बाजार मूल्य 800 करोड़ से ज्यादा है के लिए तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है। इसके खिलाफ विधायक दिलीप सिंह परिहार ने पहल करते हुए विधानसभा में सवाल भी उठाया था। जिसके तहत तत्कालीन कलेक्टर अजय गंगवार ने इसके लिए कार्यवाई भी शुरू कर दी थी। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस मामले को शांत करवा दिया था। लेकिन अब नपा में हो भूमि घोटाले के हो रहे खेल को देखकर इस भूमि को लेकर भी शहरवासी कई कयास लगा रहे है।
कुल मिलाकर दशपुर एक्सप्रेस में छपी खबर की माने तो वर्तमान में नगरपालिका में रिक्त पड़ी भूमि को लेकर बंदरबाट चल रही है। सभापति मोटवानी इस खेल में पहले पायदान पर खड़े होकर पूरा मैनेजमेंट देख रहे हैं। अब देखना है कि जब नपा में नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति के द्वारा दिए गए सबूतों के आधार पर प्रशासन धारा 41 के तहत और हाईकोर्ट के आदेश को अनदेखा कर अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुँचाने में मोटवानी के ऊपर कार्यवाई करता है या नहीं।