मंदसौर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भारत की हजारों वर्षों पुरानी ऋषि परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक उत्सव है। योग भारत की वह अमूल्य धरोहर है, जिसने संपूर्ण विश्व को स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाया है। यह बात समाजसेवी एवं भाजपा नेता विनय दुबेला ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की आत्मा है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को निरोगी, अनुशासित एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए योग की महान परंपरा विकसित की। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का एक संपूर्ण विज्ञान है।
दुबेला ने कहा कि वर्तमान समय में जब पूरा विश्व तनाव, अवसाद, असंतुलित जीवनशैली और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है, तब योग मानवता के लिए सबसे प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। योग न केवल रोगों से बचाव करता है, बल्कि जीवन को अधिक ऊर्जावान, सकारात्मक और आनंदमय बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग को अभूतपूर्व वैश्विक पहचान मिली है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव को रिकॉर्ड संख्या में देशों का समर्थन प्राप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ज्ञान-विज्ञान की वैश्विक स्वीकार्यता का ऐतिहासिक क्षण था।
दुबेला ने कहा कि आज विश्व के प्रमुख देशों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और संस्थानों में करोड़ों लोग योग को अपना रहे हैं। योग ने भारत की सांस्कृतिक शक्ति को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई है तथा वसुधैव कुटुम्बकम् और एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की भावना को मजबूत किया है।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। नियमित योगाभ्यास से स्वस्थ शरीर, निर्मल मन और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में एक सशक्त माध्यम है और प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है।