चित्तौड़गढ़। श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के वातावरण में गुरुवार को शुभ लाभ कॉलोनी (भंडारिया रोड, श्याम नगर के आगे) स्थित ‘‘राधे-कृष्ण कुंज’’ में श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कथा का आयोजन 18 से 24 जून तक प्रतिदिन दोपहर 12.15 बजे से किया जा रहा है। कथा का वाचन भागवताचार्य वैदिक पंडित राजेन्द्र शास्त्री (रिछावटा वाले) के मुखारविंद से हो रहा है।
आयोजनकर्ता परिवार के श्रीमती ज्योति कुमावत एवं श्री दिनेश कुमावत ने बताया कि कथा प्रारंभ होने से पूर्व प्रातः 9रू15 बजे श्याम नगर स्थित खाटू श्याम मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन एवं जयघोष के साथ यात्रा में सहभागिता की। कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया।
कथा के प्रथम दिवस पर भागवताचार्य पंडित राजेन्द्र शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत श्रवण मनुष्य के हृदय में भक्ति का संचार करता है। भक्ति के माध्यम से ज्ञान का उदय होता है और ज्ञान से वैराग्य की प्राप्ति होती है। अंततः आत्मा परमात्मा की ओर अग्रसर होकर शाश्वत शांति, आनंद और मोक्ष की अनुभूति करती है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। इसके श्रवण से मन की शुद्धि, परिवार में सौहार्द और समाज में सकारात्मकता का वातावरण निर्मित होता है। जहां श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भागवत कथा का आयोजन होता है, वहां भगवान श्रीराधा-कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है।
पंडित शास्त्री ने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब उसके साथ विनम्रता और भक्ति जुड़ी हो। श्रीमद्भागवत का श्रवण व्यक्ति के अहंकार को समाप्त कर उसे आत्मबोध और परम सत्य की अनुभूति की ओर ले जाता है। उन्होंने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु जीवन को दिशा देने वाली दिव्य शक्ति हैं। गुरु की शरण में जाकर ही व्यक्ति के भीतर विवेक, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना का जागरण होता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत 23 जून को सायं 8 बजे संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बालाजी मित्र मंडल, दलोट द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं 24 जून को सायं 4 बजे पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी के साथ महोत्सव का समापन होगा।