रामपुरा। ग्राम सालरमाला निवासी गोपाल पिता लिंबाजी ने अपनी पुत्री के लापता होने और बाद में उसका कंकाल मिलने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते उनकी शंका के आधार पर कार्रवाई करती, तो संभवतः उनकी बेटी की जान बचाई जा सकती थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गोपाल ने बताया कि 12 जून को उन्होंने अपनी पुत्री ज्ञानी बाई को ससुराल रावतभाटा भेजने के लिए बस में बैठाया था। बस कंडक्टर को रावतभाटा तक का टिकट दिलवाकर बेटी को सुरक्षित उतारने के लिए भी कहा गया था। गांधीसागर तक उनका पुत्री से संपर्क बना रहा, लेकिन इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया।

जब कई बार संपर्क करने के बावजूद बात नहीं हो सकी तो परिजनों ने ससुराल पक्ष से जानकारी ली। वहां से भी बताया गया कि ज्ञानी बाई रावतभाटा नहीं पहुंची है। इसके बाद परिजनों ने रावतभाटा सहित आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

गोपाल के अनुसार गांधीसागर क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज देखने पर गांव का ही एक युवक बल्लू पिता देवीलाल बस के पीछे मोटरसाइकिल से जाता दिखाई दिया। इस आधार पर उन्होंने 13 जून को थाना रामपुरा में पुत्री की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए उक्त युवक पर शंका व्यक्त की थी।

परिजनों का आरोप है कि उनकी शिकायत और शंका के बावजूद संबंधित व्यक्ति से तत्काल पूछताछ नहीं की गई। बाद में 19 जून को पुलिस उन्हें अपने साथ एक स्थान पर ले गई, जहां मिले कंकाल, कपड़ों और एक पैर की पायजेब की पहचान उन्होंने अपनी पुत्री की बताई। घटना के बाद परिवार में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा पुलिस की भूमिका की भी जांच हो। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
