चितौड़गढ़। राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के अनुसार राजस्थान में पक्षियों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए 50 पक्षीघर बनाए जाएंगे ये पक्षीघर 33 लवकुश वाटिकाओं तथा 17 अन्य स्थानों पर बनाए जाएंगे। जिसके लिए 43.50 करोड़ रूपए का अतिरिक्त बजट मंजूर किया गया था जिसके अंतर्गत चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर लवकुश वाटिका मोहर मंगरी के निर्माण के लिए 87 लाख रुपए की निर्माण स्वीकृति मंजूर कर दी गई है।
राजस्थान धरोहर प्राधिकरण बोर्ड के अध्यक्ष राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने बताया की ये पक्षीघर उदयपुर के गुलाब बाग के पक्षीघर की तर्ज पर बनेंगे। उनके निर्माण, पक्षियों के लिए भोजन एवं विदेशी पक्षियों के क्रय पर प्रति पक्षीघर 87 लाख रूपए का व्यय होगा।
राज्यमंत्री ने बताया कि विलुप्त हो रही है पक्षियों की प्रजातियां पक्षियों को बचाने का ये मुख्यमंत्री का एक सराहनीय संवेदनशील कदम है . घटते वन क्षेत्र की वजह से पक्षियों की प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं. जो प्रजातियां बची हुई है उनको बचाने के लिए ऐसे पक्षी घरों की बहुत आवश्यकता है मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पालतू जानवरों की दुकानों से पक्षी भी खरीदेंगे पक्षी घर जिसमे कुल 87 लाख रूपए व्यय किए जाएंगे। इसी राशि में से एक-एक लाख रुपए से पक्षीघरों में कोकटियल (ऑस्ट्रेलियाई बर्ड), लवबर्ड तोता, बजरिगर (बुग्गी तोता), गिनी फाउल (चकोर मुर्गा) आदि पक्षी खरीदे जाएंगे।
सीएम अशोक गहलोत की इस मंजूरी से राज्य में पक्षियों को संरक्षण देने के साथ-साथ बीमार, असहाय और घायल पक्षियों का इलाज और संवर्धन किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023-24 के बजट में 50 पक्षी गृहों के निर्माण की घोषणा की थी इसी घोषणा के क्रियान्वयन में चित्तौड़गढ़ मोहर मगरी स्तिथ लवकुश वाटिका के लिए यह मंजूरी दी गई है।
अमूमन पक्षी पेड़ों पर घोंसले बनाकर ही रहते हैं और इन घोंसलों का निर्माण भी वे तिनका-तिनका एकत्रित करके करते हैं। लेकिन, इन दिनों मानव निर्मित पक्षी घरों का प्रचलन बढ़ रहा है। इन पक्षीघरों में पक्षी घोंसलों के बजाय इंसानों की ही तरह फ़्लैट में रहते हैं, वो भी एकसाथ हजारों की तादाद में इन मूक परिंदों के लिए बनाये जाने वाले इन विशेष पक्षीघरों में आमजन पक्षियों को दाना-पानी देने पहुँचते हैं, जिससे पक्षियों को फ्लैट से बाहर आने तक की जरूरत नहीं होती है।