नीमच। एक सच्चाई यह भी है कि प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की हालत बद से बद्तर बनती जा रही है। यह शिक्षक कोई मुफ्त में राशि नहीं मांग रहे हैं। अपनी मेहनत का मानदेय जिसके यह हकदार है। अगर यही इन्हें समय पर मिल जाए तो इनके लिए अच्छे दिन भी होंगे और अच्छी रक्षाबंधन भी मन जाएगी। आखिर क्या कारण है कि मध्य प्रदेश के यह अतिथि शिक्षक मार्च 2023 से अपनी मेहनत के मानदेय के लिए आस लगाए बैठे हैं। क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी व नेताओं को यह एहसास नहीं की अगर उन्हें दो-तीन महीने का वेतन नहीं मिले तो क्या होगा। कैसे यह अपने घर की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। इन अतिथि शिक्षकों में से किसी के बीवी बच्चे भी होंगे। किसी के माता-पिता भी घर में होंगे। जो उन पर आश्रित हो सकते हैं। ऐसे में तीन-तीन माह तक वेतन नहीं मिलने से इन परिवार वालों पर क्या गुजर रही होगी।
मानदेय के अभाव में ऐसे अतिथि शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने होली नहीं मनाई। परंतु हर घर तिरंगा के संदेश पर अमल करते हुए अपने घर तिरंगा भी लहराया। अब रक्षाबंधन का त्यौहार नजदीक है ऐसे में अतिथि शिक्षक एवं शिक्षिकाओं द्वारा रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाना संभव हो पाएगा ? आखिर कैसे यह अतिथि शिक्षिका बहने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते नजर आएंगी।
जिला शिक्षा अधिकारी से अतिथि शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के बारे में चर्चा की तो उनका कहना है कि बजट नहीं आया है। लाडली बहनो का बजट तो आ गया। उनके प्रचार प्रसार पोस्टर बैनर में लाखों रुपए खर्च भी हो रहे हैं। परंतु नौनिहालों का भविष्य संवारने वाले अतिथि शिक्षिका बहनो एवं शिक्षकों का बजट कहां गुम हो गया ? सोचने वाली बात है। यही नहीं इन अतिथि शिक्षकों को उनके कालखंड के हिसाब से भुगतान किया जाता है। परंतु ऐसे मामले संज्ञान में आ रहे हैं कि इन्हें दूसरे शिक्षकों के अनुपस्थित रहने पर उनके भी कालखंड में भेज दिया जाता है। तो फिर इन्हें उस अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक की जगह कार्य करवाने का भुगतान किया जाएगा? नहीं कतई नहीं इसे तो शिक्षा विभाग सेवा बता रहा है। मध्य प्रदेश में अच्छे दिनों की बात की जा रही है विकास यात्रा निकाली जा रही है। योजनाओं के ढिंढोरे पीटे जा रहे हैं। पढ़े-लिखे युवा कहां जाए हर जगह इनका शोषण हो रहा है। शासकीय स्कूलों में अतिथि शिक्षक बनकर जाए तो समय पर 3 से 4 महीने तक मानदेय नहीं मिल रहा है। प्राइवेट स्कूलों में जाए तो इतना कम वेतन की मजदूर भी शर्मा जाए। कुछ प्राइवेट स्कूलों के तो ऐसे हाल होते हैं कि दिखाने को पूरे वेतन का चेक दिया जाता है और बाद में उनसे वापस तय अनुबंध के मान से शेष राशि वापस ले ली जाती है। ऐसा कई जगह देखने को मिलता है। इन अतिथि शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं का तीन से चार माह का बकाया मानदेय क्या रक्षाबंधन से पूर्व खातों में आएगा या फिर इनके भाइयों की कलाई सुनी रहेगी। क्या जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने यह जानना चाहा कि मार्च से इन्हें वेतन क्यों नहीं आ रहा है या फिर बजट नहीं आने पर जिम्मेदार वरिष्ठो से पत्राचार किए गए। यह देखने वाली बात होगी परंतु मीडिया का कार्य है सच दिखाना सोए हुए सिस्टम को जगाना जो निरंतर जारी रहेगा।
अब सवाल यह है कि लाडली बहनों के खातों में एक क्लिक से पहुंच रही। राशि की तर्ज पर इन अतिथि शिक्षिका बहनों एवं भाइयों के खाते में मेहनत का बकाया मार्च 2023 से जुलाई का मानदेय पहुंचेगा। उक्त जानकारी अंबालाल गुर्जर ब्लाक अध्यक्ष मनासा आजाद अतिथि शिक्षक संघ द्वारा दी गई।