बड़वानी। राष्ट्रीय सेवा योजना का 54वां स्थापना दिवस के अवसर पर 27 सितम्बर को सिकल सेल एनीमिया तथा नशा मुक्ति अभियान जागरूकता कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. वंदना भारती एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल के मार्गदर्शन में बड़े हर्षाेल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. मनीष मालवीया मनोरोग विशेषज्ञ जिला चिकित्सालय बड़वानी ने अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि सिकल सेल रोग जन्मतजात रक्त विकार है रक्त में जीन्स के अनेक सेट होते हैं जो आप अपने जन्म देने वाले माता-पिता से प्राप्त करते हैं।
प्रत्येक सेट आपके शरीर में एक खास भूमिका निभाता है, जैसे आपकी आंखों के रंग का निर्धारण या आपकी त्वचा के रंग को तय करना। जीन्स के एक अन्य सेट द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि लाल रक्त कोशिकाएँ कैसे बनी हैं और वे किस प्रकार से काम करती है, और यह एक ऐसी विशेषता है जिसे आप अपनी आंखों से नहीं देख सकते हैं। इन जीन्स को हीमोग्लोबिन जीन्स कहा जाता है, जिनका नाम लाल रक्त कोशिकाओं में शामिल प्रोटीन के नाम पर रखागया है जो आपके शरीर में ऑक्सीज़न के परिवहन का काम करता है। आप अपने पिता और माता, दोनों से एक-एक हीमोग्लोबिन (एचबी) जीन प्राप्त करते हैं। सिकल सेल रोग के गुणों वाले व्यक्तियों में एक सामान्य हीमोग्लोबिन जीन (एचबीए) होता है और दूसरा सिकल हीमोग्लोबिन जीन (एचबीएस)होता है। एचबीएस के कारण लाल रक्त कोशिकाएं दरांती (सिकल) के आकार में बदल जाती हैं। सिकल सेल गुण होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी को “ट्रेस” सिकल सेल रोग है। वास्तव में, इसके विपरीत होता है। सिकल सेल गुण, रोग से पूरी तरह से अलग होता है; संभावित रूप से इसके कारण लक्षण हो सकते हैं, लेकिन इसके उदाहरण बहुत ही कम हैं। सिकल सेल रोग को अंतरित करने का जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि क्या माता-पिता में से दोनों में उसके गुण हैं या उन्हे यह रोग है। ऐसे माता-पिता से पैदा होने वाले प्रत्येक बच्चे को संभावित रूप से सिकल सेल रोग हो सकता है। आपका रोग आपके जीन्स के प्रकार पर निर्भर करता है । सिकल सेल रोग वास्तव में विभिन्न प्रकार के रक्त विकारों के समूह को कहा जाता है जो “सिकल” हीमोग्लोबिन (एचबीएस) से होता है। एबीएस, सिकल रोग के सभी रोगियों में सामान्य रूप से पाया जाता है। डॉ. मनीष मालवीया द्वारा बताया गया कि नशे के द्वारा होने वाले शारीरिक और मानसिक हानि के बारे जानकारी देकर इससे समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभार के बारे में जानकारी दी। यह एक कटु सत्य है कि नशीले पदार्थों के सेवन से पीड़ित व्यक्ति को पारिवारिक एवं सामाजिक अलगाव और लोगों की उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। इससे निश्चित रूप से उन्हें मानसिक और शारीरिक कष्ट एवं आघात पहुंचता है। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनीता भायल ने किया एवं आभार प्रो. सीमा नाईक ने माना।
इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. स्नेहलता मुझाल्दा डॉ. जगदीश मुजाल्दे डॉ. रविन्द्र बरड़े डॉ. विक्रम सिंह चौहान, डॉ. दिनेश सोलंकी, डॉ. प्रियंका देवड़ा, प्रो. सीमा नाईक, डॉ. विक्रम सिंह भिड़े, डॉ. इन्दु डावर, डॉ. तंजीम कायनात शेख, प्रो. शोभाराम वास्केल प्रो. अंकिता पागनिस, संदीप दासौंधी एवं लगभग 200 छात्राएँ उपस्थित रही।