बडवानी शासन प्रशासन और समाज यदि समन्वय के साथ किसी सामाजिक सरोकार के प्रति समर्पित होता है तो खाली पड़ी पथरीली भूमि हो या दुर्गम पहाड़ सभी स्थानों पर हम हरित क्रांति लाकर पत्थर में फूल खिला सकते हैं। इस बात का उदाहरण बड़वानी जिले में प्रशासन के द्वारा सामाजिक ताने-बाने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए नवाचार हैं। जिससे आज दो वर्ष बाद यह सभी स्थान रेवा कुंज, सोन कुंज लोनसरा की शिव टेकड़ी, दही बेड़ा का पहाड़ और नव विकसित पर्यटन स्थल शिवकुंज वर्ष 2023 की थीम ‘‘ पर्यटन और हरित निवेश ‘‘ को साकार करता नजर आ रहा है। लगभग दो वर्ष पूर्व प्रशासन ने आमजन में पर्यावरणीय संचेतना जगाने के लिए शहर से लगी हुई पहाड़ियों को हरा-भरा बनाने के लिए सघन प्रयास किए, आज यह पहाड़ियां नई पीढ़ी को हरियाली का संदेश दे रही हैं। बड़वानी के आशाग्राम स्थित शिवकुंज नव पर्यटन स्थल के रूप में प्रदेश भर में जाना पहचाना जाने लगा है यहां ध्यान, अध्यात्म, योग एवं फिटनेस का अद्भुत संगम नजर आता है। शिवकुंज के स्वयंसेवकों के साथ-साथ शिवकुंज योगा ग्रुप के सदस्य प्रतिदिन आकर स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में श्रमदान कर अपना योगदान प्रदान कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर शिवकुंज योगा ग्रुप के सदस्यों के द्वारा खरपतवार उखाड़ने का कार्य किया। पूर्व कुलपति एवं जाने-माने इतिहासकार एवं आशाग्राम ट्रस्ट के सचिव डॉ शिवनारायण यादव ने कहा बड़वानी जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं यहा एक और जहां नर्मदा विहार जैसे पर्यटन को विकसित किया जा सकता है, वही इको टूरिज्म सर्किट का निर्माण कर जिले के सभी पर्यटन स्थलों को जोड़कर पर्यटन और हरित निवेश के प्रयास को साकार किया जा सकता है। इस दौरान बड़ी संख्या में शिवकुंज के योग साधक उपस्थित थे।