ग्वालियर। उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर में शनिवार 9 दिसम्बर को आयोजित हुई नेशनल लोक अदालत में 4 खंडपीठों द्वारा आपसी सुलह समझौते के आधार पर 337 प्रकरणों का निराकरण किया गया। साथ ही मोटर दुर्घटना क्लेम अपील प्रकरणों में पीडित पक्षकारों को 2 करोड़ 87 लाख 62 हजार रूपये का अतिरिक्त क्षतिधन भी दिलाया गया।
मुख्य न्यायाधिपति एवं मुख्य संरक्षक, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन तथा उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति रोहित आर्या के मार्गदर्शन में उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण के लिए न्यायाधिपति रोहित आर्या एवं सीनियर एडवोकेट अरविंद दूदावत, न्यायाधिपति मिलिंद रमेश फड़के एवं सीनियर एडवोकेट एमपीएस रघुवंशी, न्यायाधिपति अवनींद्र कुमार सिंह एवं एडवोकेट अनिल कुमार मिश्रा एवं न्यायाधिपति आनंद पाठक एवं एडवोकेट अनिल कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ गठित की गई थीं।
निराकृत प्रकरणों में से एक प्रकरण से संबंधित विवरण इस प्रकार है कि वर्ष 2012 के मार्च माह में 28 तारीख की सुबह 9 बजे मोटर सायकल से मोनू गुप्ता अपने दोस्त हेमंत पाण्डे के साथ भितरवार से ग्वालियर के लिये आ रहे थे। मार्ग में डबरा-ग्वालियर रोड पर सोनी वाटिका के सामने ग्वालियर की तरफ से दूध टेंकर के चालक ने तेज व लापरवाही पूर्वक मोटर सायकल को टक्कर मार दी, जिसमें मोनू गुप्ता को गंभीर चोंटे आने से वह घायल हो गए और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस प्रकरण में विचारण न्यायालय द्वारा दी गई क्षतिपूर्ति धन राशि में माननीय उच्च न्यायालय राशि रूपये 10 लाख की वृद्धि की गई।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार एवं सचिव अखिलेश कुमार मिश्र ने बताया कि लोक अदालत का मूल उद्देश्य आपसी वैमनस्यता एवं विवादों का आपसी सहमति व राजीनामा के आधार पर प्रकरणों का निराकरण करना है। जिस कारण उभयपक्ष के मध्य विद्यमान विवाद बिना किसी की हार-जीत के साथ समाप्त हो। इसी मूल भावना को आधार बनाकर इस नेशनल लोक अदालत के पूर्व न्यायमूर्ति रोहित आर्या, प्रशासनिक न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के मार्गदर्शन में उच्च न्यायालय में विचाराधीन राजीनामा योग्य प्रकरणों मुख्यतः बीमा कंपनी के प्रकरणों को चिन्हित कर सूची तैयार की गई। इसके बाद बीमा कंपनी के अधिकारी/अधिवक्तागण तथा पक्षकार व उनके अधिवक्तागण के साथ विभिन्न दिनांकों को प्री-सिटिंग आयोजित की जाकर राजीनामा के आधार पर प्रकरणों के निराकरण के लिए उभयपक्ष में सहमति बनाई गई। जिसके फलस्वरूप 158 क्लेम प्रकरणों सहित कुल 337 प्रकरणों का इस लोक अदालत में निराकरण किया गया है।