उज्जैन। डॉ. हेडगेवार जन्म शताब्दी स्मृति सेवा न्यास द्वारा अयोध्या में भगवान राम लाल की प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व श्री राम जन्मभूमि विजय गाथा विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान के मुख्य वक्ता बीजेपी मध्य प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने राम जन्म भूमि को लेकर चले आंदोलन का आंखों देखा हाल सुनाते हुए कहा कि जब राम जन्म भूमि आंदोलन की यात्रा के 40 साल पीछे देखता हूं तो उस यात्रा की स्मृति मेरे मानस पटेल पर सामने आ जाती है। संकट यह है कि इसमें किसे छोड़े और किसकी बात कहें। हर कर सेवक की अपनी-अपनी राम कहानी है।
विक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागृह में आयोजित डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यान के तहत मुख्य वक्ता जयभान सिंह पवैया पुरानी स्मृतियों को टटोलते हुए करीब 40 वर्ष पहले हुए आंदोलन का आंखों देखा हाल सुनाया। उन्होन कहा रामजी के वनवास जाने के बाद अयोध्या के राजरहित होने के बाद कौशल्या ने 14 साल तक टकटकी लगाकर निहारा था मेरा राम कौन से पल आएंगे। कौशल्या के राम तो 14 साल में आ गए, पर मेरे राम तो 500 साल में लौट कर अपने राज भवन में आ रहे है। इसी मनोदशा में आज पूरा भारत खड़ा है। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में देखें तो 77 युद्ध हुए है। अयोध्या में जिन कार सेवकों का बहता हुआ रक्त आज भी जय श्री राम बोलता है। उन्होने कहा कि पहली बात यह कि हमें सोचना चाहिए आखिर हमारे धार्मिक स्थलों को ही निशाना क्यों बनाया गया। यदि गजनी को संपदा ही लूटने थी तो अन्य जगह जाता। सोमनाथ के मंदिर में जब गजनी का घन टूटता है तो यह सोना चांदी लूटने के लिए नही टूटा था, बल्की यह भारत की आस्था को तोडऩे के लिए हथौड़े चलाते थे। आक्रांताओं को यह पता था कि अगर हिंदुस्तान को तोडऩा है तो हिंदुस्तानियों की आस्था के धागे को तोड़ो। यह देश बिखर जाएगा।