नीमच। हम बंगला बगीचा वासी लम्बे समय से अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। कुछ लोगों ने खुलकर साथ दिया तो कुछ लोगों ने नहीं दिया, पर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा किए गए सभी वादे झूठे एवं खोखले निकले। बंगला बगीचा क्षेत्र की जनता हर बार भारतीय जनता पार्टी पर अपना विश्वास जताया परंतु हर बार बंगला बगीचा क्षेत्र के रहवासियों को धोखा ही मिला। बंगला बगीचा क्षेत्र में हर वर्ग के लोग रहते हैं चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान या किसी अन्य धर्म के लोग। ज्यादातर लोग भाजपा को ही वोट देते आए हैं और यह आस लगाए बैठे हैं कि कभी तो हमारी सरकार हमे इस समस्या से छुटकारा दिलाएगी।
उन्होंने कहा कि बंगला बगीचा संघर्ष समिति ने जब नगरीय निकाय चुनाव एवं विधानसभा चुनाव के पूर्व आंदोलन किया तो कांग्रेस के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी बंगला बगीचा वासियों को इस बात का आश्वासन दिया कि यदि वह सत्ता में आएंगे तो इस समस्या को जनहित में सुलझाएंगे और नहीं भी सत्ता में आए तो भी समस्या समाधान के लिए संघर्ष करेंगे। परंतु चुनाव होते ही कांग्रेसी भी बंगला बगीचा क्षेत्र की जनता को भूल गए। अब बंगला बगीचा क्षेत्र कि जनता कि यह स्थिति है कि उनपर जो काला कानून थोपा गया है उसको पालन करने के अलावा बंगला बगीचा क्षेत्र की जनता के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है । थोपे गए व्यवस्थापन के कानून के अनुसार यदि निश्चित समय में बंगला बगीचा वास यदि व्यवस्थापन नहीं कराते हैं तो उनकी संपत्ति को शासन द्वारा राजसात कर लिया जाएगा और अब यदि व्यवस्थापन के लिए आवेदन लगाते हैं तो उनके ऊपर भारी भरकम वित्तीय भोज पेनल्टी सहित डाला जायेगा।
उन्होंने कहा कि बंगला बगीचा वासी जिनके द्वारा व्यवस्थापन नहीं करवाया गया है उनके लिए इधर कुआं और उधर खाई वाली स्थिति हो गई है । यदि व्यवस्थापन कराते हैं तो भारी भरकम राशि पेनल्टी सहित जमा करनी पड़ेगी और व्यवस्थापन के आधे अधूरे कानून को मानना पड़ेगा और यदि व्यवस्थापन नहीं कराते हैं तो उनकी संपत्ति शासन में निहित होने का डर है । वर्तमान में बंगला बगीचा क्षेत्र की जनता डर एवं भय के माहौल में जीने को मजबूर है । बंगला बगीचा क्षेत्र की जनता के लिए ना तो सत्ताधारी पार्टी के लोग संघर्ष करने को तैयार हैं और न ही विपक्ष के । जिस दिन जनता पर संकट आएगा उस दिन उन्हें खुद की लड़ाई खुद ही लड़नी पड़ेगी । तो फिर किस दिन का हम इंतजार कर रहे हैं ! क्यों न हम आज ही एकजुट होकर इस लड़ाई को पूरी ताकत से गैर राजनैतिक आंदोलन के रूप में सड़को पर आकर लड़ें । क्योंकि हम आज विरोध नहीं करेंगे तो कल हमारी आने वाली पीढ़ियां कौसेगी और कहेगी कि हमने उन्हें विरासत में क्या दिया । अपने अधिकारों के लिए लड़ना हमे ही पड़ेगा । किसी और के लिए नहीं अपने अधिकारों ने लिए लड़ना सीखो ।