भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार, 11 अगस्त को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की 32वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वन पर्यटन को बढ़ावा देने, वन्यप्राणियों के आदान-प्रदान और वन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। कुल 30 प्रस्ताव बैठक में प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 29 को मंजूरी दी गई, जबकि एक प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए रखा गया।
मुख्यमंत्री ने वन विभाग को प्रदेश में वन पर्यटन के विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्यप्राणी पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने की क्षमता रखते हैं। पर्यटन विभाग के साथ समन्वय कर ऐसे क्षेत्रों के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा गया, जहां वन पर्यटन की संभावनाएं मौजूद हैं।
होम स्टे को बढ़ावा देने पर जोर
सीएम डॉ. यादव ने वन क्षेत्रों के आसपास होम स्टे को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों, वनवासियों और जनजातीय परिवारों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे। वन पर्यटन का लाभ केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जंगलों के आसपास रहने वाले परिवारों की आर्थिक समृद्धि का माध्यम बनना चाहिए।
बाघ देकर दूसरे राज्यों से लाए जाएंगे वन्यप्राणी
मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों के साथ वन्यप्राणी आदान-प्रदान की प्रक्रिया को बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश से बाघ देकर आंध्रप्रदेश, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों से हाथी, गैंडे और अन्य वन्यप्राणी लाए जा सकते हैं। इसके लिए संबंधित राज्यों से समन्वय कर युवा और स्वस्थ वन्यप्राणियों के आदान-प्रदान की दिशा में कार्य करने को कहा गया।
वनग्रामों में सड़क, मोबाइल टावर और स्वास्थ्य सुविधाओं को मंजूरी
मंजूर 29 प्रस्तावों में राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व की परिधि में स्थित वनग्रामों में सीसी रोड, पक्की सड़क, मोबाइल टावर, उप स्वास्थ्य केंद्र और विद्युत लाइन जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसे क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्थानीय आबादी को विश्वास में लेकर ही किया जाए।
वन सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और वन संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। वन भूमि के डायवर्सन और अवैध उत्खनन पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने मानव और वन्यप्राणी के सह-अस्तित्व पर जोर देते हुए कहा कि वन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए, लेकिन इससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने वन्यप्राणी बोर्ड में केंद्र सरकार और राज्य पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने का सुझाव भी दिया।