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July 15, 2024, 7:06 pm
KHABAR : धर्ममय हुआ नीमच, आचार्य श्री जिन सुंदरसुरीजी मसा के प्रवेश में उमड़े श्रद्धालु भक्त, भजनों की स्वर लहरियों पर जमकर थिरके, पढ़े खबर 

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 नीमच। श्री भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर श्रीसंघ नीमच में चातुर्मास के लिए पूज्य आचार्य भगवंत श्री जिनसुंदर सुरिजी मसा एवं पूज्य आचार्य भगवंत श्री धर्मबोधी सुरीजी मसा आदि ठाणा 8 ,व साध्वी दृष्टी रेखा श्रीजी मसा आदि ठाना 4 का नीमच नगर प्रवेश 14 जुलाई 2024 सोमवार को सुबह हुआ। पूज्य आचार्य भगवंत के नगर प्रवेश का सामैया जुलूस  सोमवार को सुबह 8.39 से प्रारंभ होकर सुबह 10 बजे तक जैन भवन पर पहुंचा और  और वहां धर्मसभा संपन्न हुई। जुलूस में सबसे आगे दो युवा जैन शासन की ध्वज पताका लहराते चल रहे थे तो 2 घुड़सवार और दो ऊंट चल रहे थे। उसके बाद बैंडबाजे पर भजनों की स्वर लहरिया बिखर रही थी। महिलाएं मंगल कलश लिए चल रही थी। पुरुष श्वेत परिधानों में मधुर ‌भजनों की स्वर लहरियों पर लाल साफा पहने नृत्य की मस्ती में झूम रहे थे। मार्ग में स्थान स्थान पर श्रद्धालु भक्तों द्वारा अक्षत गहूली कर साधु साध्वी व्रंद से आशीर्वाद ग्रहण किया गया एवं आचार्य भगवंत के प्रवचन एवं धर्मसभा हुई। 

धर्म सभा में आचार्य श्री धर्मबोधी सुरी ने कहा कि जिनवाणी के श्रवण करने से मानव जीवन में निरोगिता सुख समृद्धि प्रसन्नता मिलती है जिनवाणी संसार से त्याग कर समाधि की ओर मोक्ष मार्ग दिखाती है। रात्रि भोज का त्याग करते हैं तो हम कभी भी बीमार नहीं होंगे चातुर्मास में जिनवाणी श्रवण करने का संकल्प लेना चाहिए भोजन में संयमित जीवन के लिए  न्यूनतम 6 ही पदार्थ का उपयोग करना चाहिए। संतों का लक्ष्य संसार के सभी प्राणियों का कल्याण करना होता है। संसार में जिनवाणी सबसे महत्वपूर्ण होती है। समोसरण में मंदिर नहीं होता है क्योंकि प्राणियों का कल्याण  प्रमुख लक्ष्य होता है। संसार में रहते हुए  तपस्या कर आत्मा का कल्याण कर सकते हैं। संसार में चाहे कितने ही परेशानी आए जिनवाणी को छोड़ना नहीं चाहिए। काम क्रोध माया  त्याग कर जीवन में परिवर्तन करना ही चातुर्मास का उद्देश्य होता है। आचार्य जिन सुंदर श्री जी महाराज साहब ने कहा कि चातुर्मास गुरु की महिमा तपस्या को अनुभव कराता है। संतो की तपस्या आराधना शक्ति का केंद्र होती है। अच्छे पुण्य कर्म करेंगे तो हमें गुरु का आशीर्वाद शक्ति के रूप में मिलता है। जीव दया के बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है इसलिए जीव दया का पालन करते रहना चाहिए।परमात्मा से गुरु मिलाता है। जो चल नहीं पाता है उसे दौड़ना सिखा दे, बुराई के अंधेरे से अच्छाई के उजाले में ले जाए । निर्धन को धनवान बना दे वही सच्चा गुरु होता है। गुरु के सत्संग बिना संसार में अंधेरा होता है।  चातुर्मास का समय मनुष्य के जीवन में अच्छाई का  उजाला लेकर आता है। साधु संतों की संगत से मूर्ख भी ज्ञानी बन जाता है। अहिंसा सत्य को जीवन में अपना कर अपराधी भी ज्ञान प्राप्त कर सकता है।पाप कर्मों का त्याग कर पुण्य का बैंक मजबूत करना चाहिए। संयम जीवन बिना कल्याण नहीं हो सकता है। आपने कहा की संघ तीर्थ के समान होता है गुरु के प्रवचन जीवन का विकास करते हैं। धर्म सभा में पूजा के पाट पर लाल परिधान पर अक्षत से रांगोली श्रृंगारित की गई। सभा में स्वागत उद्बोधन श्रीसंघ अध्यक्ष अनिल नागौरी ने दिया।

चातुर्मास प्रवेश कार्यक्रम धर्म सभा में वरिष्ठ समाजसेवी मनोहर सिंह लोढ़ा अखेसिंह कोठारी शोभागमल  डोसी ,पारस लसोड सहित विभिन्न पदाधिकारी सदस्य वह समाज जन एवं बड़ी संख्या में विभिन्न शहरों से पधारे महाराज साहब के गुरु भक्त उपस्थित थे। धर्मसभा के बाद कार्यक्रम में पधारे हुए महानुभावों की नवकारसी (लाभार्थी श्रीसंघ) के द्वारा हुई। 

पूज्य आचार्य भगवंत ने कहा कि उनकी श्रीसंघ में सामूहिक सिद्धितप एवं अन्य तपस्याए कराने की भावना है। सामूहिक सिद्धितप जिनको भी करने की भावना हो तो उसके अभिमंत्रित पास आचार्य श्री द्वारा पास देना प्रारंभ किए गए।भीड़भंजन श्रीसंघ में चातुर्मास करने के लिए पधार रहे दो-दो आचार्य भगवंत, पन्यास भगवंत एवं 12 साधु भगवंतों के दर्शन वंदन का लाभ नीमच वासियों को मिला  सुबह 9बजे 12 साधु साध्वीजी की अगवानी की गई और उसके बाद में श्रद्धालु भक्तों ने प्रवचन एवं नवकारसी का लाभ लिया। सभा का संचालन श्री संघ सचिव मनीष कोठारी ने किया।

इनका किया सम्मान-
 धर्म सभा के मध्य बाल मुनी दयानिधान विजयजी मसा के दादा मोरारजी भाई पार्ला संघ, संपत भाई ,विनोद भाई, ललित भाई, दिनेश कुमार जैन ,राजू भाई, परेश पटवा ,नितिन भाई घाटकोपर ,प्रकाश भाई जैन, जयंत भाई जैन, रमेश भाई मोरबी ,अजीत करणपुरिया आदि अतिथियों का ट्रस्ट पदाधिकारीयों द्वारा शाल श्रीफल प्रदान कर मोती माला से सम्मानित किया गया।

 

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