बड़वानी। यह जरूरी नहीं है कि हमारे मित्र ने जो विषय लिया है उस विषय में हम उसकी अपेक्षा पढ़ाई में अपने आप को सहज रख पाए फिर भी उस विषय का चयन करना हमें अवसाद की ओर ले जाता है, और यह धीरे-धीरे विषाद बनकर आत्महत्या की और अग्रसर कर सकता है ।इसलिए ऐसे विषय का पढ़ाई के दौरान चयन करें जिसमें हमें अनुकूलता महसूस होती है और हमारे रुचि में भी इसका समावेश रहता है। रुचि के विषय को लेकर हम विशेषज्ञ बन सकते हैं उक्त बातें जिला चिकित्सालय बड़वानी के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ मनीष मालवीय ने राज्य आनंद संस्थान के तत्वाधान में आशादीप आनंद क्लब एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र आशाग्राम ट्रस्ट बड़वानी द्वारा आयोजित विश्व आत्महत्या निषेध दिवस के अवसर पर आशा इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया मनुष्य का जीवन ईश्वर द्वारा प्रदत्त अनुपम उपहार है जिसके समक्ष सारे उपहार बोने प्रतीत होते हैं। संवाद के दौरान उन्होंने बच्चों से भी चर्चा कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत कर विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने बताया इस वर्ष विश्व आत्महत्या निषेध दिवस की थीम चेंजिंग द नॉरेटिव ऑन सुसाइड जो संवाद को महत्व देता है। जिस तरह हम शरीर की अन्य बीमारियों के लिए तत्काल परिजनों से बात कर संबंधित चिकित्सक को दिखाते हैं वैसे ही अवसाद, अनिद्रा ,गुमसुम की अवस्था आदि के साथ साथ आत्महत्या जैसे विचार के लिए भी हमें परिवार में और विशेषज्ञों से संवाद करना चाहिए। सकारात्मक संवाद से सभी समस्याओं का निदान निकल सकता है। इस दौरान आशा ग्राम ट्रस्ट के कार्यकर्ता एवं आशा इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग के प्राचार्य पल्लवी यादव एवं समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। आयोजन हेतु आवश्यक मार्गदर्शन आनन्द विभाग के डॉ राम सहाय यादव एवं अनिल जोशी के द्वारा प्रदान किया गया।