भोपाल। प्रदेश के 4800 अतिथि विद्वान जल्द ही अतिथि शिक्षकों की तर्ज पर मोहन सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल सकते हैं। अतिथि विद्वानों के आंदोलन की वजह एक साल से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई घोषणाओं पर अमल नहीं हो पाना है। अतिथि विद्वान संघ ने कहा है क महाविद्यालयों में 25 साल से पढ़ाने के बाद भी वे कांग्रेस और बीजेपी की सत्ता में फुटबाल की तरह बनकर रह गए हैं। अब एक साल बाद फिर वे सरकार को याद दिला रहे हैं कि उनके लिए की गई गोषणाओं पर सरकार अमल करे।
राजधानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए अतिथि विद्वान नियमितिकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुरजीत भदौरिया और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि कई अतिथि विद्वान पचास साल की उम्र पार कर चुके हैं। इसलिए अब उन्हें निकाला नहीं जाएगा, ऐसा ऐलान खुद पूर्व सीएम शिवराज ने अपने निवास पर बुलाई गई अतिथि विद्वानों की महापंचायत में किया था। इस संघ के द्वारा कहा गया कि विभाग द्वारा ट्रांसफर के नाम पर हर साल अतिथि विद्वानों को यह कहकर हटा दिया जाता है कि महाविद्यालय अतिथि विद्वान कार्यरत नहं है जबकि नियुक्ति और वेतन हर माह विभाग द्वारा दिया जाता है।
50 हजार मासिक देने कहा था, 22 से 25 दिन का वेतन मिलता है
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भदौरिया ने बताया कि 11 सितम्बर को जो घोषणा की गई थी, उसमें से एक पर भी अमल नहीं किया गया। पहले 1500 एक कार्यदिवस पर मिलते थे जिसे पूर्व सीएम शिवराज ने 50 हजार रुपए तक महीने फिक्स वेतन के रूप में देने को कहा था। इसके विपरीत सिर्फ दो हजार रुपए कार्यदिवस के हिसाब से वेतन दिया जाता है। ऐसे में किसी महीने 22 दिन तो किसी महीने 25 दिन का वेतन मिलता है। राष्ट्रीय और धार्मिक अवकाश के दिन अगर बुला लिया तो उसका वेतन नहीं मिलता है। इसके अलावा अन्य कोई सुविधा भी नहीं दी जा रही है।