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September 11, 2024, 5:03 pm
BIG REPORT : खंडवा में किसानों का बड़ा प्रदर्शन, सोयाबीन की एमएसपी को लेकर सड़कों पर उतरे 5 हजार किसान, 200 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ निकाली आक्रोश रैली, पढे़ खबर 

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खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में सोयाबीन के सही दाम नहीं मिलने से नाराज किसानों ने आज आक्रोश रैली निकली. सुबह से जिले के 360 से ज्यादा गांवों के किसान सब्जी मंडी में इकट्ठा हुए फिर 200 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर शहर की सड़कों से गुजरे. किसानों की मांग है कि सरकार ने जो सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4892 तय किया है, लेकिन इससे ज्यादा किसानों इसमें खर्चा आता है. पिछले कई सालों में महंगाई बढ़ी है लेकिन 2012 में जो सोयाबीन का भाव था. आज 2024 में भी सोयाबीन वही भाव बिक रही है. इस लिए किसानों की मांग है की सोयाबीन के दाम 6 हजार रु, मक्का 2500, कपास 10 हजार रु और गेहूं 3500 रुपए प्रति क्विंटल के दिए जाए। 


किसानों ने निकाली आक्रोश रैली
खंडवा में आज एमएसपी की मांग को लेकर हजारों की संख्या में किसानों ने आक्रोश रैली निकाली. ये रैली सब्जी मंडी से शुरू हुई, जो शहर के नगर निगम से होते हुए बॉम्बे बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची. यहां प्रधानमंत्री के नाम संयुक्त कृषक संगठन सहित अन्य किसानों संगठनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. किसानों की मांग है कि वर्तमान में सोयाबीन की फसल आने वाली है, ऐसे में आवक बढ़ने पर सोयाबीन के भाव और काम हो जाएंगे. इससे किसानों को अपनी लागत भी निकलना मुश्किल हो रहा है. सरकार को चाहिए की सोयाबीन की एमएसपी 6000 रूपए से ज्यादा तय करें ताकि किसानों इसका लाभ मिले। 


15 सालों के निम्न स्तर पर सोयाबीन की कीमत
संयुक्त किसान संगठनो के नेताओ का कहना है कि पूरे देश में सोयाबीन की कीमत पिछले 15 सालों के निम्न स्तर पर हैं. कृषि लागत डीज़ल, खाद, रासायनिक कीटनाशक मजदूरी और महंगाई बढ़ी है, लेकिन सोयाबीन के भाव नहीं बड़े हैं. वर्ष 2012 में जो सोयाबीन का भाव था आज 2024 में भी सोयाबीन वही भाव बिक रही है. इन 12 वर्षों में सोयाबीन की लागत लगभग दोगुनी हुई है, लेकिन कीमतों में सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य में इतनी वृद्धि नहीं हुई है. सरकार द्वारा जारी सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4892 रुपए से लगभग 1000 रुपए नीचे बिक रही है। 

 

10000 से 15000 रुपए का आर्थिक नुकसान
किसानों को फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है और यह फसल घाटे का सौदा साबित होती जा रही है. प्रति एकड़ किसान को लगभग 10000 से 15000 रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार सोयाबीन का समर्थन मूल्य पर खरीद कर उसे पर 10 प्रति किलो के हिसाब से 1000 बोनस राशि सीधे किसानों के खाते में डाली जाए, जिससे कि हमें सोयाबीन के 6000 रूपए से ज्यादा भाव मिल सके।


सेटेलाईट सर्वे प्रणाली स्वीकार नहीं
वहीं दूसरी किसानों की मांग है की फसल बीमा नीति में संशोधन कर खेत को इकाई माना जायें औसत उत्पादन 3 वर्ष का किया जाए। सेटेलाईट सर्वे प्रणाली किसानों को स्वीकार नहीं है, इसलिए रेंडम प्लाट पद्धति ओर नेत्राकंन सर्वे प्रणाली ही रखा जाए. 2018 से लेकर 2023/24 खरीफ सीजन में हुए फसल बीमा घोटाले की जांच कराई जावे अन्यथा यह योजना बंद कर दी जाए। 

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