उज्जैन। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ के सभागृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जेल में 147 महिला व पुरूष बंदियों ने अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण कार्य किया। इस दौरान जेल प्रशासन की ओर से टीवी स्क्रीन पर चल चित्र के माध्यम बिहार के गयाजी तीर्थ के दर्शन भी कराए गए। जेल में रहते श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों को तर्पण देने से बंदियों के चेहरे पर भी खुशी के भाव थे।
श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान आदि का विशेष महत्व है। श्राद्ध पक्ष के चलते शनिवार को केंद्रीय जेल भैरवगढ़ के सभागृह में 38 महिला व 109 पुरूष बंदियों ने अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए सामूहिक रूप से श्राद्ध कर्म किया। इस बार जेल प्रशासन द्वारा प्रार्थना सभागृह में टीवी स्क्रीन लगाकर बिहार के गयाजी तीर्थ के विभिन्न स्थानों के चल चित्र के माध्यम से दर्शन भी कराए गए है। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ के अधीक्षक मनोज कुमार साहू ने कहा कि जेल के बंदियों के लिए तर्पण, पूजन कार्य स्थानीय पुरोहित श्याम पंचोली द्वारा करवाया जा रहा है। उद्देश्य यही है कि श्राद्ध पक्ष के चलते जेल में निरूद्ध बंदियों को भी पूर्वजों का तर्पण करने का लाभ मिल सके। करीब 147 महिला-पुरूष बंदियों ने तर्पण-पूजन किया है। इस दौरान श्री सिद्धवट तीर्थ के स्थानीय पुरोहित श्याम पंचोली घोड़ी वाला पंडा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चर कर बंदियों से पूजन व तर्पण कराया गया। पुरोहित पंचोली ने बताया कि विगत आठ वर्षाे से जेल में निरूद्ध बंदियों को श्राद्ध पक्ष के दौरान तर्पण पूजन कार्य कराया जा रहा है। इस बार प्रयास यह किया गया है कि बिहार के गयाजी तीर्थ के चलचित्र फोटो टीवी स्क्रीन पर दिखाते हुए उन स्थानों के महत्व को बताकर पूजन तर्पण कार्य कराया गया है। जिससे बंदियों को गयाजी तीर्थ के दर्शन व ध्यान करने पर किए गए तर्पण का वैसा ही फल प्राप्त हो सके जो उन तीर्थाे पर जाकर तर्पण कार्य करने पर मिलता है। बंदियों की भी कामना होती है कि बिहार के गया जी में पितृ कर्म किया जाए, लेकिन जेल में बंदी होने के कारण गयाजी या अन्य तीर्थ तक नही पहुंच पाते है। वहीं जेल परिसर सिद्धवट तीर्थ के समीप होकर माँ शिप्रा के किनारे होने से यहां कराए गए पूजन, तर्पण का भी उतना ही फल प्राप्त होता है। जेल में हुए सामूहिक तर्पण के दौरान उप जेल अधीक्षक नवीन नीमा, जसवंत सिंह , सहायक उप जेल अधीक्षक सुरेश गोयल मौजूद थे।