बड़ी सादड़ी। परिवार दिवस पर जैन दिवाकर प्रवचन हॉल में आयोजित विशेष प्रवचन सभा में प्रवचन प्रभाविका महासाध्वी धैर्य प्रभा ने रविवार को कहा कि परिवारों के टूटने का प्रमुख कारण शब्दों का तालमेल नहीं होना। अर्थात बड़ों को बोलना नहीं आता और छोटों को सहना नहीं आता। तुम कितने खुश हो और तुमसे कितने खुश है इस पर विचार करें।
अनेक परिवारों में बड़े- बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता तो कहीं पर छोटों से स्नेह नहीं रखते। चौरासी लाख योनियों को पार करके यह अमूल्य मनुष्य जन्म मिला है और इस अनमोल जीवन को ईर्ष्या, लड़ाई-झगड़ों में और अहंकार में व्यर्थ करना मूर्खता है।
प्रभाविका महा साध्वी धैर्य ने कहा कि बिना हड्डी की जीभ कितनों की हड्डियां तुड़वा देती है और कितने ही परिवारों के दिलों को तोड़ देती है।इस जीभ को काबू में रखें।दिमाग और विचारों से अपने परिवार को स्वच्छ रखो।क्योंकि जहां गंदगी होती है वहां राहु- केतु का निवास हो जाता है और जहां राहु-केतु का निवास होता है,वहां लक्ष्मी का निवास नहीं होता है। सुख-दुख में एक दूसरे का हमेशा साथ देना चाहिए।जब मुसीबत आये तो एक हो जाओ। और अपनों की परायो के सामने कभी भी बुराई मत करो।अर्थात विभीषण की भूमिका मत निभाओ।जिन परिवारों में माता-पिता साथ में एवं खुश रहते हो वह संयुक्त परिवार कहलाता है।बुजुर्गों का आशीर्वाद संस्कारों का खजाना होता है संयुक्त परिवार।
फलदार वृक्ष हमेशा झुका हुआ रहता है और बाल्टी कुएं में झुकेगी तभी वह पानी से भरेगी।इसी प्रकार हर झुकने वाला कभी कमजोर नहीं होता है। अगर आप अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ भी खुश नहीं रह सकते तो अनंत सिद्धों के साथ कैसे रह पाओगे। गृह लक्ष्मी अर्थात जो अपने मन वचन और काया से अपने परिवार को खुशहाल बना देती है।
एकासन का मासखमण पूर्ण सिद्धि मेहता द्वारा एकासन का मासखमण पूर्ण करने पर बालिका मंच द्वारा प्रवचन सभा मे अभिनंदन किया गया।
मंगलवार से जैन रामायण
मंगलवार से रोजाना महा साध्वी धैर्य प्रभा के मुखारबिंद से सुबह 8.45 बजे से 10 बजे तक जैन रामायण का जैन दिवाकर प्रवचन हॉल में वाचन किया जाएगा। गुप्त परिवार ने रोजाना प्रवचन सभा में लाटरी द्वारा पांच चांदी के सिक्के खोले जाएंगे। प्रवचन सभा में हमीरगढ़,बांसी, बोहेड़ा,सांगरिया,डूंगला आदि से गणमान्य श्रावक-श्राविकाएं आए।