चित्तौड़गढ़। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय एवं कट्स मानव विकास केंद्र द्वारा लघु एवं सीमांत कृषक परिवारों में कृषि मशीनरी को बढ़ावा देने हेतु व कृषि में श्रम साध्य साधनों के उपयोग पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा पंचदेवला, चित्तौडगढ में आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रयोजित परियोजना के अन्तर्गत आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के आरम्भ में प्रोफेसर, प्रसार शिक्षा डॉ लतिका व्यास ने कृषि में महिलाओं के योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए किसानों को जरूरत है सघन एवं सूक्ष्म अवधि वाली फसलो की किस्मो को अपनाने की। इसके लिए उन्नत बीज, खाद एवं समय पर कृषि कार्यो को सम्पन्न करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रो का उपयोग करना आवश्यक हो गया है। इनके कृषि में उपयोग से मानव श्रम न्यूनतम हो जाएगा है साथ ही कृषि यंत्रों के उपयोग से कृषि कार्यों में लगने वाले श्रम व समय को 20-30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही डॉ. व्यास ने सौर कुकर से सुर्य की उर्जा के द्वारा बिना किसी लागत व धुंआ रहित खाना बनाने के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
प्रशिक्षण की मुख्य वक्ता डॉ हेमू राठौड़, वैज्ञानिक एक्रिप ने कृषक महिलाओं के श्रम व साध्य साधनों के उपयोग पर प्रकाश डाला साथ ही उन्नत दरांती, मक्का छीलक यंत्र, मूंगफली छीलकयंत्र, ट्रांस्प्लान्टर, वेजीटेबल पिकिंग बैग, सोलर हेट, अंगुली मे पहने जाने वाली सब्जी कटर आदि पर प्रशिक्षण दिया। साथ ही महिलाओं द्वारा उनके सुरक्षित उपयोग को भी सुनिश्चित किया गया इसके साथ-साथ ही बताया की इन सभी कृषि यंत्रो का उपयोग कर समय व लागत को कम किया जा सकता है। राकेश यादव ने ड्रॉन से नेनो यूरिया का छिडकाव कर किसानो को दिखाया व इसकी उपयोगिता के बारे में बताया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ आदर्श शर्मा, प्रोग्राम ऑफिसर, अनुष्का तिवारी, गौहर महमूद, गायत्री मोड़ एवं नर्बदा शंकर आदि ने भी विचार व्यक्त किये।