सीहोर। शिक्षा से वंचित 15 साल से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए नव भारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग संचालित कर रहा है। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम उल्लास में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए गठित राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण ने एक एप विकसित किया है।
जानकारी के अनुसार डोर-टू-डोर सर्वे और साक्षरता कक्षाओं की मॉनिटरिंग जियो टैग के माध्यम से की जा रही है। असाक्षर व्यक्ति जिन्हें बुनियादी साक्षरता का ज्ञान नहीं है या साक्षरता का प्रमाण-पत्र नहीं है। उन्हें बुनियादी साक्षरता संख्यात्मक के साथ महत्वपूर्ण जीवन-कौशल जैसे वित्तीय साक्षरता, कानूनी जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और व्यावसायिक कौशल सिखाने के लिए यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। साक्षरता कार्यक्रम में स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, एनसीसी और स्काउट गाइड के कैडेट्स की मदद ली जा रही है। असाक्षर व्यक्ति को ष्उल्लास अक्षर पोथीष् के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक मूल्यांकन में केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के साक्षरता विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने सीहोर के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर परीक्षा की मॉनिटरिंग की।
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम उल्लास वर्ष 2022 से शुरू हुआ है। जो 2027 तक निरंतर संचालित होगा। अभी तक 3 मूल्यांकन परीक्षाओं का आयोजन किया जा चुका है। उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम में शामिल स्वयं-सेवकों को अक्षर साथी का नाम दिया गया है। साक्षरता से जुड़े पाठ्यक्रमों को वीडियो के जरिए वॉट्सऐप ग्रुप, यू-ट्यूब और पोर्टल के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है।