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September 24, 2024, 3:22 pm
KHABAR : काला फिल्म का प्रसारण अवैध, जनसुनवाई में की शिकायत, सिनेमैटोग्राफ़ अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड या सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट, पढे़ नौशाद नूर की खबर 

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बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में स्थानीय कलाकारों द्वारा निर्मित फिल्म श्कालाश् को अवैध बताते हुए मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत की गई है। बुरहानपुर मज़दूर यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा फिल्म पूर्णतः अवैध है क्योंकि सिनेमैटोग्राफ़ अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड या सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट नहीं लिया गया है जोकि किसी भी फिल्म को थिएटर में लगाने से पूर्व लेना अनिवार्य होता है। 


कोई भी व्यक्ति फिल्म बनाए और बिना किसी सरकारी अनुमति प्रमाण पत्र के टैक्स चोरी करते हुए थिएटर मालिक को फिल्म चलाने के लिए दे दे ऐसी फिल्म को नहीं चलाया जा सकता। टॉकीज मालिक अपनी मर्ज़ी से निर्णय नहीं ले सकता यह शासकीय नियम विरुद्ध है। 


गौरतलब है केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) जिसे सामान्यतः सेंसर बोर्ड भी कहा जाता है भारत में फिल्मों, टीवी धारावाहिकों, टीवी विज्ञापनों और विभिन्न दृश्य सामग्री की समीक्षा करने संबंधी विनियामक निकाय है। यह भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन होता है। प्रत्येक फिल्म, धारावाहिक, विज्ञापन इत्यादि के टॉकीज व टीवी में जाने से पूर्व बोर्ड की एग्जामनिंग कमेटी प्रमाण पत्र प्रेषित करती है उसके पश्चात ही प्रसारण की अनुमति प्राप्त होती है।


मज़दूर यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने आगे कहा फिल्म के प्रदर्शन में न केवल अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी हुई बल्कि जीएसटी एंटरटेनमेंट टैक्स की भी खुल्लम खुल्ला चोरी हुई है। एंटरटेनमेंट टैक्स लेना नहीं लेना राज्य सरकार का निर्णय होता है। इसके अतिरिक्त बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति के फिल्म का प्रमोशन शहर के चौक चौराहों पर किया जा रहा है जोकि सरासर नियमों का उल्लंघन है।

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