मंदसौर। डॉ. मनीष ईगोले उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंदसौर द्वारा बताया कि विश्व रेबीज दिवस जो रेबीज के बोझ के बारे में जागरूकता पैदा करने और उसके निवारक उपायों को उजागर करने के लिये एक वैश्विक कार्यक्रम है। स्वास्थ्य क्षैत्र और पशुपालन के विशेषझों सहित दुनियाभर में हजारों व्यक्तियों, पशुकल्याण कार्यकर्ताओं, पशुकल्याण संगठनों, पालतु कुत्तों के लिये नियमित पशु विरोधी रेबीज टीकाकरण और निराश्रित कुत्तों के लिये बडे पैमाने पर एण्टी रैबीज टीकाकरण के माध्यम से रैबीज के नियंत्रण और जिम्मेदार पालतू स्वामित्व से संबंधित मुद्दो पर जनता से संवेदनशील बनाने के साथ हम सभी के लिये मानव के सबसे अच्छे दोस्त की मदद करने का सही समय है । रेबीज एक घातक बीमारी है जो मनुष्यों एवं पशुओं में पागल कुत्ते के काटने से फैलती है, क्योंकि वे पागल कुत्तों के लिये आसान लक्ष्य है। संक्रमित जानवर से लार के साथ टुटी हुई त्वचा या श्लेस्म झिल्ली के संक्रामक के माध्यम से भी जोखिम हो सकता है । एक बार जब बीमारी से न्यूरोलॉजिकल लक्षण विकसित हो जाते हैं, तो रेबीज पशुओं और मनुष्य दोनों के लिये घातक होता है । रेबीज पुरी तरह से रोकथाम योग्य है। सभी कुत्तों का सामुहिक टीकाकरण रेबीज के नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) अपने पंजीकृत पशुकल्याण संगठनों और स्थानिय नगर निकायों के माध्यम से पूरे देश में पशु जन्म नियंत्रण (ABC)/ एण्टी रैबीज टीकाकरण कार्यक्रम की सुविधा के लिये भारत शासन की नोडल एजेन्सी है । AWBI ने पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत निराश्रित कुत्तों की नशबंदी के लिये मानक संचालन प्रक्रिया और उनके एण्टी रैबीज टीकाकरण पर एक मेन्यूअल निकाला है । इसके लिये कुत्ते के मालिक, नागरिक, समाज, पशुकल्याण, और गैर सरकारी संगठन सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं । पशु जन्म नियंत्रण/एण्टी रेबीज कार्यक्रम, बडे पैमाने पर रेबीज टीकाकरण और शिक्षा कार्यक्रमों को बढावा देकर, क्रियान्वित करके रेबीज के बौझ को कम किया जा सकता है । उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा रेबीज मुक्त जिला बनाने के लिए जिलेवासियों से सहयोग प्रदान करने की अपील।