सिंगोली। सिंगोली थाना अंतर्गत ग्राम थड़ोद निवासी दीपक पिता बाबूलाल राठौर ने रतनगढ़ निवासी ससुर मुरलीधर राठौर द्वारा लगाए गए दहेज प्रताड़ना के आरोप को गलत बताया है।
दीपक का कहना है कि यह आरोप उसके द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किए गए। धारा 98 के इस्तगासा के बाद लगाया गया है। जबकि उसने माननीय न्यायालय के समक्ष आवेदन देकर अपनी पत्नी ललिता को उसकी मर्जी के खिलाफ विगत तीन माह से मायके में रोके रखे जाने की शिकायत दर्ज कराई है।
दीपक का दावा है कि उसने पत्नी के साथ कभी भी मारपीट नहीं की और पत्नी ललिता अपनी मर्जी और राजी खुशी से मायके वालों के साथ कुछ दिनों के लिए रतनगढ़ गई थी। दीपक ने बताया कि उसने ससुराल पक्ष से दहेज को लेकर कभी भी कोई मांग नहीं की है। बल्कि उसके तमाम सोने चांदी के गहने भी पत्नी के मायके में ही रखे हैं। उन्हें भी लाने के लिए पत्नी से कभी नहीं कहा गया।
दीपक ने बताया कि ससुर मुरलीधर राठौर निहायत लालची और खुदगर्ज है, वह पुत्री के गहने हड़पने की नियत रखने के साथ-साथ उससे चार लाख रुपए की भी मांग कर रहा है। जब उसे लगा कि मांग पूरी नहीं होगी तो उसने पत्नी ललिता को मायके में ही रोक लिया।
दीपक ने बताया की पत्नी ललिता को लेने के लिए कई बार उसने अपने रिश्तेदारों को रतनगढ़ भेजा, लेकिन ससुर मुरलीधर ने उन्हें वापस लौटा दिया। कई बार खुद उसने भी पत्नी को भेजने के लिए कहा लेकिन ससुर ने उसकी एक नहीं सुनी। बाद में परेशान होकर ही उसने 20 सितंबर 2024 को माननीय न्यायालय के समक्ष धारा 98 के तहत इस्तगासा पेश कर पत्नी को वापस लाने की गुहार लगाई थी।
दीपक राठौड़ का कहना है कि ससुर मुरलीधर राठौर इस कार्रवाई से विचलित हो गया है और उसके खिलाफ झूठी शिकायतें कर रहा है। दीपक राठौर ने बताया कि ससुर मुरलीधर ने मेरे परिजनों द्वारा पत्नी के साथ मारपीट करने और कान के पर्दे फटने का जो आरोप लगाया है, सरासर गलत है। जबकि ससुर को मालूम है ललिता का पहले से ही एम वाय हॉस्पिटल इंदौर में इलाज चल रहा है।