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September 27, 2024, 12:20 pm
KHABAR : मोबाइल कंपनियां नहीं दे रही थी टावर शुल्क, वसूली को लेकर लगाई थी हाईकोर्ट में याचिका,कोर्ट ने कहा- नगर निगम की वसूली उचित, पढे़ खबर 

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जबलपुर। शहर में मोबाइल कंपनियों के द्वारा सैकड़ों टावर लगाए गए हैं, और इन मोबाइल कंपनियां से नगर निगम एक निर्धारित शुल्क वसूली करनी होती है, पर 2010 से कंपनियों ने शुल्क नगर निगम को जमा नहीं कि, इतना ही नहीं मोबाइल कंपनियों ने हाईकोर्ट में नगर निगम की वसूली को चुनौती देते हुए याचिका दायर करते हुए कहा कि मोबाइल कंपनियां टावर से कोई मुनाफा नहीं काम आती है, लिहाजा नगर निगम को शुल्क वसूली पर रोक लगाया जाए।


मामले पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि मोबाइल टावर से निकलने वाली किरणें मनुष्य और प्राणियों के लिए खतरनाक है, लेकिन मोबाइल सेवा भी जरूरी है, ऐसे में शहर में लगी टावर से नगर निगम की वार्षिक शुल्क वसूली भी पूरी तरह से उचित है। हाई कोर्ट ने मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि नगर निगम को भुगतान किया जाए।


हाई कोर्ट जस्टिस जी एस अहलूवालिया की कोर्ट ने मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि 15 दिन के भीतर लंबित शुल्क नगर निगम को अदा किए जाएं। समय सीमा के भीतर अगर मोबाइल कंपनियों के द्वारा भुगतान नहीं किया जाता है तो फिर 6 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम ने प्रत्येक टावर के लिए जो वार्षिक शुल्क 3000 रुपए रखी है वह राशि बहुत कम है इसके बाद भी मोबाइल कंपनियों के द्वारा भुगतान नहीं किया गया है जो की सही नहीं है, लिहाजा हर कंपनियों को भुगतान किया जाना चाहिए।


नगर निगम ने बताया कि आइडिया सेल्युलर, वोडाफोन, भारती इंफ्राटेल, क्विप्पो टेलीकॉम एवं अन्य कंपनियों ने जबलपुर शहर में मोबाइल टावर लगाए हुए हैं और वार्षिक शुल्क वसूली महज तीन हजार रुपए निर्धारित किया गया है, इस पर भी टेलीकॉम कंपनियों को आपत्ति है। मोबाइल कंपनियों ने शुल्क वसूली को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर की हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि नगर निगम की प्रत्येक टावर से वार्षिक शुल्क वसूली पूरी तरह से उचित है।


मोबाइल कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि मोबाइल टावर से मोबाइल कंपनियों को कोई मुनाफा नहीं होता है और इस वजह से शुल्क वसूली करना सही नहीं है। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि राज्य शासन द्वारा इनको नियंत्रित करने हेतु नोडल एजेंसी निर्धारित किया गया है। नगर निगम ही टावर इंस्टॉल करने की अनुज्ञप्ति जारी करता है इसलिए शुल्क वसूली पूर्णता वैधानिक है। कंपनियों ने 2010 से अभी तक भुगतान नहीं किया है जो की हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एकमुश्त जमा करना होगा।

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