भोपाल। मध्य प्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को वन संरक्षक भोपाल वन वृत्त से मिला और वनमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कर्मचारी नेताओं ने वनरक्षकों से की जा रही वसूली पर रोक लगाने की मांग की है। संघ के भोपाल जिला अध्यक्ष नीलम सिंह ठाकुर ने कहा कि वित्त विभाग के निर्णय के खिलाफ संघ हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।
प्रदेश में 6592 वनरक्षकों से 162 करोड़ रुपए की वसूली की जा रही है। मैदानी अधिकारियों ने वसूली की राशि तय कर प्रत्येक माह वेतन से कटोती करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे वनरक्षकों में गुस्सा है। इन वनरक्षकों को 5680 का वेतन बैंड दिए जाने के कारण यह राशि वर्ष 2006 से 2014 के बीच 480 रुपए प्रतिमाह की दर से अतिरिक्त दी गई है। अब जाकर वित्त विभाग ने इसे गलत ठहराया और रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद विभाग ने वसूली निकाली है, जो प्रत्येक वनरक्षक पर 1.50 से 5 लाख रुपए तक है। इस राशि में 12 प्रतिशत का ब्याज भी शामिल है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि 5680 का वेतन बैंड वित्त विभाग के पुराने निर्णय के आधार पर ही दिया गया है। अब इसकी गलत व्याख्या कर वसूली की जा रही है। इसे फिलहाल रोक दिया जाए। संघ के जिला अध्यक्ष ठाकुर ने बताया कि इस मामले में जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं। हम कोर्ट के सामने वे सारे तथ्य सुबूत के साथ रखेंगे, जिनके आधार पर हमें 5680 का वेतन बैंड दिया गया है। उनका कहना है कि दिन-रात जंगल और वन्यप्राणियों की सुरक्षा करने वाले वनरक्षकों के साथ यह बर्ताव ठीक नहीं है।
वित्त के तर्क गलत
वनरक्षक कहते हैं कि वित्त विभाग ने गलत तर्क देकर 5680 वेतन बैंड देने को गलत ठहराया है। विभाग ने कहा है कि वनरक्षक सीधी भर्ती का पद नहीं है, तो बता दें कि वनरक्षक की भर्ती मप्र तृतीय श्रेणी अलिपिक वर्गीय वन सेवा भर्ती नियम-2000 के अंतर्गत आता है। इस नियम में भी प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित पद का उल्लेख नहीं है। नियम की अनुसूची-5 में सीधी भर्ती वाले पदों में वनरक्षक पद का भी उल्लेख है।