चित्तौड़गढ़। बिना कोई सुविधा बढ़ाये कृषि उपज मण्डी में टैक्स को बढ़ाये जाने का चित्तौड़गढ़ जिले के समस्त व्यापारियों ने रोष प्रकट करते हुए इसे हटाये जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि पूर्व में भी वर्ष 2020 में बढ़े हुए मण्डी शुल्क को हटाया गया था जिसे पुनः लागू करना न्यायोचित नहीं हैं। राज्य सरकार के गजट नोटिसफिकेशन के आधार पर 30 अगस्त से जारी आदेश में कृषि उपज मण्डी में टैक्स को बढ़ाया गया जो व्यापारियों व काश्तकारों के हितों के खिलाफ है। पानी, रोशनी, चौकीदारी, जमीन आदि की मूलभूत सुविधाओं में वृद्धि किये बिना टैक्स क्यां बढ़ाया गया। टैक्स वृद्धि से किसानों की उपज की कीमत कम हो जायेगी और किसानों को नुकसान की आशंका है। दिल्ली व गुजरात में भी मण्डी शुल्क नहीं होने से राजस्थान में भी यह माफ होना चाहिये और यदि कहीं भी मण्डी शुल्क लगाया जाता है तो वह न्यायोचित नहीं है। एक तरफ सरकार किसानों को प्रोत्साहन के लिए छूट दे रही है वहीं दूसरी ओर मण्डी शुल्क लगाने से कृषि उपज की दर कम कर रही है। केन्द्र सरकार द्वारा एक देश एक कर का प्रावधान कर जीएसटी लगाया गया है फिर मण्डी शुल्क का कोई औचित्य नहीं है। समस्त व्यापारीगणों द्वारा इसे तत्काल बंद किये जाने की मांग की गई।