चीताखेड़ा। विगत लगातार 4 सालों से ( सृष्टि के पालनहार) प्रकृति और सरकार धरती के पालनहार किसानों से रुठे हुए हैं। कभी अल्प वर्षा तो कभी अतिवृष्टि तो कभी शीत प्रकोप से खून पसीने से उपजाई बेशकीमती फसलों पर कहर बनकर नुकसान ढहा रही है तो वहीं सरकार भी किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई के रूप में न तो बीमा और ना ही मुआवजा दिला पा रही है। किसान कर्ज तले दबा जा रहा है। आज किसान खून के आंसू रो रहा है। कोई आंसू पोंछने वाला नहीं है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस विधानसभा और लोकसभा चुनाव हारने के बाद हाशिए पर हैं अभी भी सदमे में हैं तो वहीं दोनों चुनाव जीतने वाली भाजपा चुनाव जीत को हजम नहीं कर पा रही हैं। लगातार 4 सालों से किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए सोच भी नहीं पा रही हैं।
जब -जब भी चाहे लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव हर बार सभी पार्टियां किसानों के रहनुमा बनकर किसानों के नाम पर वोट मांगते रहे हैं , परंतु कभी किसानों का हित किसी ने नहीं किया। शुक्रवार - शनिवार को विदाई ले रहे बारिश ने एक बार फिर पलटवार करते हुए आफत बनकर आई बारिश ने किसानों के खेतों में खड़ी एवं कटी पड़ी खरीफ सीजन की फसलों को भीगो दिया यही नहीं खेतों में पानी भर जाने से खेत तालाब बन गए। बारिश के कारण सोयाबीन उत्पादक प्रभावित हो रहा है थोड़ा बहुत किसानों के मुंह आया निवाला भी छीन लिया है। ऐसे संकट के समय भी विपक्षी दल कांग्रेस तो दूर सत्ता पक्ष राजनेता जनपद पंचायत सदस्य, अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक, सांसद कोई भी नेता किसानों को ढांढस बंधाने तक नहीं आया। जो राजनीतिक दल कांग्रेस हो या भाजपा जहां इनको लाभ होता है वहीं राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। किसान बेबस होकर सत्तारूढ़ पार्टी से अब यह उम्मीद लगाए बैठा है कि कभी नेता पीड़ा को समझे और बीमा व मुआवजा मिल जाए। चीताखेड़ा में अभी तक सिर्फ एक नेता मंडी पूर्व सदस्य राजेन्द्र सिंह तोमर ही ऐसा व्यक्ति है जो किसानों एवं आमजन की लड़ाई लड़ने मैदान में दिखाई देता है।