मंदसौर। जिले में स्थित गांधीसागर अभयारण्य में जल्द ही अफ्रीका नामीबिया से चीते लाए जाएंगे। इन चीतों के भोजन के लिए यहां प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से चीतल भी लाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में यहां कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 19 चीतलों को चीतों के बाड़े में स्वस्थ्य हालत में छोड़ा गया है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से स्वस्थ्य हालत में गांधीसागर अभयारण्य में चीतलों को छोड़ना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल चीतलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह जैव विविधता को बनाए रखने के लिए भी एक सराहनीय प्रयास है।
आपकों बता दें कि चीतल, जिसे आमतौर पर भारतीय मृग कहा जाता है, भारतीय वन्यजीवों में सबसे खूबसूरत और सजग प्रजातियों में से एक है। इनकी उपस्थिति वन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चीतल मुख्य रूप से घास के मैदानों और जंगलों में रहते हैं, और इनका प्राकृतिक शिकारियों के साथ एक प्राकृतिक संतुलन है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से चीतलों को लाने की प्रक्रिया काफी सावधानी से की गई। पहले, चीतलों की सेहत का पूरा परीक्षण किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे स्वस्थ और मजबूत हैं। इसके बाद, उन्हें सुरक्षित तरीके से गांधीसागर अभयारण्य लाया गया। यहाँ, उन्हें एक विशेष बाड़े में रखा गया, जहां उन्हें न केवल आवश्यक देखभाल मिलती है, बल्कि वे नए वातावरण में धीरे-धीरे ढलने का समय भी पाते हैं।
आपकों बता दें कि मप्र के मंदसौर-नीमच जिले के साथ ही राजस्थान के चित्तौड़ व कोटा जिले में भी गांधीसागर अभयारण्य का क्षेत्र फैला हुआ है। अभी अभयारण्य में मंदसौर-नीमच वाले हिस्से में चीतों को बसाने के लिए 64 वर्ग किमी क्षेत्र में बाड़े बनाए गए हैं। पहले इन्हीं बाड़ों में चीतों को रखा जाएगा।