बुरहानपुर। जागृत आदिवासी दलित संगठन की ओर से मंगलवार को काफी संख्या में आदिवासीय समाजजन रैली निकालकर नेपानगर स्थित तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां एसडीएम भागीरथ वाखला को ज्ञापन सौंपा जिसमें कईं मुद्दे शामिल किए गए।
देशभर के किसानों की मांग के तर्ज़ पर किसानों को फसलों का डेढ़ गुना भाव देने की कानूनी गारंटी की मांग उठाते हुए ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा गया कि आदिवासी फलियों में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। फसलों का पूरा भाव न होने के कारण,आदिवासी किसान कर्ज में डूबते जा रहें हैं।
किसान से वे मजदूर बनने पर मजबूर हो रहें हैं और अवैध ठेकेदारों के जाल में फंसकर, गुजरात और महाराष्ट्र में बंधुआ मजदूर बनने के लिए मजबूर हो रहे हैं। 2014 से ही प्रधानमंत्री द्वारा किसान आयोग की सिफ़ारिशों को लागू कर सोयाबीन, कपास, मक्का, तुअर,उड़द, जवार जैसे 24 मुख्य फसलों पर लागत का डेढ़ गुना भाव देने का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ है।
देशभर के किसान आंदोलन की मांग पर भी केंद्र सरकार द्वारा यह आश्वासन दिया जाता रहा है जो कि आज तक पूरा नहीं हुआ है। कई आदिवासी किसान वन अधिकार दावेदार हैं जो खेत का पट्टा न होने के कारण अपनी फसल को मंडी पर सरकारी भाव में बेचने से भी वंचित है। बुरहानपुर में हजारों वन अधिकार दावों को लंबित रखकर आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से भी दूर रखा जा रहा है।
एक ओर बुरहानपुर प्रशासन को नल, जल योजना के क्रियान्वयन और तथाकथित रूप से हर घर में जल पहुंचाने के नाम पर पुरस्कार दिया गया है, लेकिन सच्चाई यह है कि आदिवासी फलियों में आज भी नल, जल योजना से आदिवासी समाज वंचित हैं। महिलाओं और बच्चों को आज भी पानी अपने सिर पर ढोकर लाना पड़ता है।
सिर्फ नल जल योजना ही नहीं, पट्टे न होने के कारण आदिवासी किसान पीएम सम्मान निधि, सिंचाई के लिए स्थायी बिजली कनेक्शन, फसल बीमा योजना जैसे किसानों को मिलने वाले योजनाओं से भी वंचित हैं। जागृत आदिवासी दलित संगठन के रतन अलावे,आशा बाई सोलंकी सहित काफी संख्या में आदिवासी समाजजन मौजूद थे।