बालाघाट। शिक्षा विभाग में हालिया अतिशेष शिक्षकों को काउंसिलिंग के माध्यम से अन्य स्कूलों में पदांकित किया गया है। जिसमें एक मामला ऐसा भी है जिसमें अतिशेष सूची में बिना शिक्षक का नाम आए, शिक्षा विभाग ने उसके गृह ग्राम में पद स्थापना दे दी।
हालांकि अब शिक्षा विभाग कहते है कि ऐसा हो नहीं सकता है। जबकि कलेक्ट्रेट को शिकायत करने पहुंचे, शिक्षकों ने वह अतिशेष सूची भी कलेक्टर को दी है। जिसमें शिक्षक चंद्रकिशोर बनोटे का नाम नहीं है। जिसे अतिशेष सूची में बिना नाम आए, अतिशेष बताकर शिक्षा विभाग ने उसके गृह ग्राम में पद स्थापना का आदेश जारी करा दिया।
शिकायतकर्ता शिक्षक संतोष वाल्दे ने बताया कि आयुक्त भोपाल से अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी होने के बाद जिला शिक्षा कार्यालय में काउंसिलिंग की गई। जिसमें संस्कृत शिक्षकों एक दर्जन से ज्यादा अतिशेष शिक्षकों में केवल चार की ही पद स्थापना की गई।
जबकि अन्य लोग रिक्त स्थान से वंचित रह गए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खैरलांजी के सावरीकला में पदस्थ हुए शिक्षक चंद्रकुमार बनोटे का अतिशेष शिक्षकों की सूची में नाम ना होने के बावजूद काउंसिलिंग में उनका नाम बुलाया गया और उन्हें मनचाहे गृह ग्राम में उनकी पद स्थापना कर दी गई।
जबकि एक माह पूर्व ही प्राथमिक शिक्षक से उच्च पद पर उनकी पद स्थापना, लांजी के कुम्हारीकला में हुई थी। जबकि स्कूल में उनके और भी शिक्षक सीनियर थे। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा कार्यालय में अतिशेष शिक्षकों को सांठगांठ से उनकी मनचाही पद स्थापना की गई। उन्होंने काउंसिलिंग को रद्द करने और पुनः काउंसिलिंग कराए जाने की मांग की।
शिकायतकर्ता संतोष वाल्दे ने बताया कि सरकार की गलत नीतियों और जिला शिक्षा विभाग में काउंसिलिंग में की गई भर्राशाही के कारण अतिशेष में दूर पदांकित किए गए। मोहगांव खारा में पदस्थ रहे शिक्षक कमल पारधी की इसी चिंता में तबीयत खराब हो गई और उनकी मौत हो गई।
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि अतिशेष शिक्षकों को ही अन्य स्कूलों में भेजा गया है, अतिशेष सूची में बिना नाम के यदि किसी का अन्य जगह भेजा गया है तो इसकी सूची देखकर ही कुछ पता पाएंगे।