चीताखेडा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर गुरुवार को गांधी चबूतरे पर स्थापित गांधी जी की प्रतिमा को गांव के कांग्रेसी गणमान्यजनों ने दिप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर गांधी जी को याद किया।
विगत 15 वर्षों पूर्व किसी शरारतीयों द्वारा गांधी जी की प्रतिमा का चश्मा, नाक, कान तोड़कर पुरी प्रतिमा को खण्डित कर दिया। आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने देश के बापू पर तरस नहीं आया। वर्ष भर में 3 बार 15अगस्त , 26 जनवरी और 2अक्टूबर को उनको याद किया जाता हैं।और हमेशा ही खण्डित प्रतिमा पर ही माल्यार्पण कर ओपचारिकता पुरी कर लेते हैं। 2 अक्टूबर गुरुवार को चीताखेडा गांधी चबूतरे पर स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को जन्म जयंती पर उनको याद किया। मौके पर मंडलम अध्यक्ष राजेश जैन, सेक्टर प्रमुख युगल किशोर टेलर, पूर्व उप सरपंच विकास प्रजापत सहित कांग्रेस के गणमान्य लोग उपस्थित थे। मंडलम अध्यक्ष राजेश जैन ने गांधी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की पुरे हिन्दुस्तान में एक मात्र महात्मा गांधी ही एक ऐसे नेता थे जिन्होंने बिना ढाल -खडक और खून बहाएं बिना अग्रेंजो को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। गांधी जी का मामना था कि स्कूलों को आत्मनिर्भर होना चाहिए। सेक्टर प्रमुख युगल किशोर टेलर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गांधीजी मानवता और राजनीति दोनों के लिए अपरिहार्य है। गांधीजी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के खिलाफ कार्रवाई करके अपने आस-पास की दुनिया को बदलने का दृष्टिकोण रखते थे। उप-सरपंच विकास प्रजापत ने गांधीजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस समय गांधीजी भारत में सामाजिक क्रांति की बुनियाद खड़ी कर रहे थे उस समय भारत की आंतरिक समस्याओं में ऊंचे- नीच छुआछूत इत्यादि समस्याओं की जड़ें बहुत गहरे में जमी हुई थी। इस अवसर पर गांव के कई नागरिक मौजूद थे।