जबलपुर। हाथ से खेल यूनिवर्सिटी निकल गई है। यह अब भोपाल में बनेगी। इसके विरोध में बुधवार को शहर के घंटाघर में नागरिक उपभोक्ता मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
नागरिक उपभोक्ता मंच का कहना है कि धीरे-धीरे जबलपुर से स्पोर्ट्स फीडर सेंटर को बंद किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर छलावा क्यों किया जा रहा है। खेल संगठन के पदाधिकारी दिनेश सिंह ठाकुर ने कहा कि एक समय मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर को खेल की राजधानी कहा जाता था, पर अब धीरे-धीरे खेल से जुड़े सभी केंद्र भोपाल शिफ्ट होने लगे हैं।
नागरिक उपभोक्ता मंच के बैनर तले जबलपुर शहर के घंटाघर में प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि खेल के जितने भी संघ थे, धीरे-धीरे उन्हें उठाकर भोपाल और इंदौर शिफ्ट किया जा रहा है। जबलपुर में अब एक भी खेल एकेडमी नहीं है।
भोपाल में राजस्व विभाग से खेल विश्वविद्यालय के लिए जमीन मांगी गई
खेल संगठन के सदस्यों का कहना है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने भोपाल में राजस्व विभाग से खेल विश्वविद्यालय के लिए जमीन मांगी है। इससे स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश सरकार जबलपुर को इस उपलब्धि से वंचित कर रहा है। पूर्व में तत्कालीन केंद्रीय खेल मंत्री उमा भारती ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के रीजनल सेंटर की स्थापना जबलपुर में करने को कहा था, लेकिन बाद में इसे भोपाल में स्थापित किया गया। साई के द्वारा जबलपुर में खोले गए स्पोर्ट्स फीडर केंद्र भी अब बंद कर दिए गए हैं।
डॉक्टर पीजी नाज पांडे ने कहा कि जबलपुर को खेलधानी के रूप में माना गया था, क्योंकि 80 प्रतिशत खेल संगठनों के प्रदेश मुख्यालय जबलपुर में ही स्थापित किए गए थे, लेकिन इन्हें अब धीरे-धीरे जबलपुर से शिफ्ट कर बाहर स्थापित किया जाने लगा है। मात्र 20 प्रतिशत खेल मुख्यालय ही अब जबलपुर में बचे हैं, जो कि चिंता का विषय है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में सभी स्पोर्ट्स एकेडमी स्थापित की गई हैं और जबलपुर में एक भी नहीं है।