इंदौर। सरकारी विभागों में घमासान का एक और उदाहरण सामने आया है। सर्वे में अनुपयोगिता के बाद बीआरटीएस पर नौलखा से एलआईजी चौराहे तक एलिवेटेड कॉरिडोर को सीएम ने रोक दिया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने इसे अब तक निरस्त ही नहीं किया।
वहीं आईडीए एलिवेडेट निरस्त हुए बिना ही यहां पर फ्लायओवर बनाने के लिए सर्वे की तैयारी कर रहा है। इसके लिए निविदाएं बुलाकर दिल्ली की एजेंसी भी तय कर दी है। इसे गुरुवार को होने वाली आईडीए बोर्ड की बैठक में भी रखा जा रहा है। उधर, आईडीए के सर्वे की तैयारियों को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने इसे लेकर सवाल उठा दिए हैं। इसे लेकर कलेक्टर से भी मार्गदर्शन मांगा है।
बॉटलनैक का हल निकालने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव बनाया गया था। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में इसे निरस्त करने का निर्णय लेते हुए चौराहों पर फ्लायओवर बनाने के लिए आईडीए से सर्वे करने के लिए कहा था। आईडीए ने टेंडर बुलाए, जिसमें 6 कंपनियों ने भाग लिया है।
दिल्ली की कंपनी वीकेएस इंफ्राटेक ने सबसे कम 93 लाख रुपए कोट किए हैं। वहीं कागजों पर इसे निरस्त करने के आदेश ही नहीं हुए हैं। ऐसी स्थिति में दूसरी एजेंसी द्वारा सर्वे करवाने का निर्णय मुश्किल पैदा कर सकता है। क्योंकि पीडब्ल्यूडी टेंडर निरस्त करता है तो उसे शर्तें के अनुरूप कंपनी को टेंडर की कीमत का 10 फीसदी व अन्य क्लेम देना होंगे। ब्रिज को लेकर दो बार पहले भी सर्वे हो चुके हैं।
ब्रिज के सर्वे में ये मुश्किलें आएंगी
मामले में पहले ही एक एजेंसी का सर्वे में इसकी उपयोगिता कम आ रही है। जिसे आधार बनाकर यह सब निर्णय लिए गए हैं। भविष्य में भी इसकी उपयोगिता कम आती है तो इसके निर्माण पर कई तरह की उलझनें आएंगी। वर्क ऑर्डर निरस्त करेंगे तो क्षतिपूर्ति राशि देना होगी। आईडीए के सर्वे पर पीडब्ल्यूडी दोबारा इसी कंपनी को काम दे सकेगी, इसमें भी मुश्किल आएगी।
जानिए एलिवेडेट की इबारत अब तक
कॉरिडोर पर पहले मंत्री नितिन गडकरी ने डिजाइन और लागत ज्यादा होने पर सवाल उठाए थे। केंद्रीय फंड से राशि मिलने के कारण निर्माण एजेंसी आईडीए से बदलकर पीडब्ल्यूडी हो गई। विभाग ने अहमदाबाद की कंपनी राजकमल बिल्डर्स को वर्कऑर्डर भी जारी कर दिया। फरवरी में सीएम ने शिलान्यास किया था। मई में उपयोगिता सर्वे के आधार पर काम रोक दिया था। पिछले दिनों सीएम की मौजूदगी में ही इसे निरस्त करने का निर्णय लिया था।