उज्जैन। होली पर्व पर देश भर के कई इलाकों में अलग-अलग परंपराओं का निर्वहन होता है। ऐसे ही एक परंपरा उज्जैन में चली आ रही है। जिसमें आसपास के क्षेत्रों से महिला-पुरुष और बच्चे शामिल होते हैं।
उज्जैन के उन्हेल, बिछड़ोद, गोयला बुजुर्ग जैसे इलाकों में लोग धधकती आग और अंगारों पर पैदल चलते हैं। खास बात ये है कि महिलाएं और पुरुष अपनी जान के साथ साथ बच्चों को गोद में उठाकर आग पर चलते हैं।
उज्जैन जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूर ग्राम गोयला बुजुर्ग में मन्नत पूरी होने पर नंगे पांव धधकते अंगारों में चलने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि आग पर चलने से मन्नत पूरी होती है। साथ ही दुख का नाश होता है। सालों से चली आ रही इस परंपरा को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। गोयला बुजुर्ग गांव में गोपेश्वर महादेव के मंदिर में लोग मन्नत मांगते हैं। जब भक्तों की मन्नत पूरी हो जाती है तो वे होली पर्व पर मंदिर में आते हैं। परंपरानुसार आग में पैदल चलकर भगवान को मन्नत पूरी होने पर धन्यवाद अर्पित करते हैं।आस्था और विश्वास का नजारा मध्य प्रदेश के उज्जैन के घट्टिया तहसील के गोयला बुजुर्ग सहित उन्हेल और बिछ्ड़ोद में भी देखने को मिलता है।
गोयला बुजुर्ग में इस बार मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी मन्नत रखी थी। भगवान से मांगी मन्नत पूरी होने पर करीब 100 से अधिक लोग 11 फीट के चूल पर धधकते अंगारों में नंगे पांव चले। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल थे।
अंगारों में नंगे पांव चलने से किसी का पैर नहीं जलता। जिनकी मन्नत पूरी होती है वे अंगारे पर चलते हैं। इसे गांव में चूल बोला जाता है। इस बार मुस्लिम समुदाय के शाहरुख ने अपनी शादी के लिए मन्नत मांगी थी, शादी होने के बाद वह शुक्रवार को धधकते हुए अंगारों पर चला। उसने बताया कि मन्नत पूरी होने पर वह परम्परा निभाने मंदिर आया था।
ख़ास बात ये की होली पर्व पर इस तरह की परम्परा निभाने वाले लोग जान की परवाह किए बिना आग में पैदल चलते है। इनमें से कुछ लोग अपने बच्चों को गोद में उठाकर आग में चलते है। जिससे कैसी भी समय हादसा हो सकता है। लेकिन लोगो का मानना है की भगवान की कृपा सब पर रहती है इसलिए आज तक कोई हादसा नहीं हुआ।