भोपाल। प्रतिनियुक्ति से लौटे कर्मचारी की मंत्री कार्यालय से अनुमति लिए बगैर पदस्थापना की गई, नाराज स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने संचालक लोक शिक्षण केके द्विवेदी को निलंबित करने की नोटशीट लिख दी है।
मंत्री ने 3 फरवरी को यह नोटशीट लिखी थी और 7 दिन में कार्यवाही करने को कहा है पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस नोटशीट को ही दबा गए। उधर संचालक ने अपनी सफाई में एक पत्र लिखा है, जो विभाग के सचिव को दिया गया है।
शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति से लौटे कर्मचारियों की मनमाने तरीके से पदस्थापना का मामला पुराना है। ऐसे मामलों में विभाग के पूर्व मंत्री इंदर सिंह परमार भी पूर्व में आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।
दरअसल, राजधानी में शिक्षा विभाग के लगभग 12 कार्यालय हैं, जिनमें कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया जाता है। जब इन कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति समाप्त की जाती है तो मंत्री से पदस्थापना के बारे में नहीं पूछा जाता। मंत्री इसी से नाराज भी हैं।
उनका कहना है कि प्रतिनियुक्ति से लौटे कर्मचारी की पदस्थापना उनके आदेश से होना चाहिए। विभाग की कार्यप्रणाली में मंत्री से प्रशासकीय अनुमोदन लेकर ही पदस्थापना करने की व्यवस्था है।
मंत्री ने नोटशीट में कहा है कि संचालक ने सीधे ही पदस्थापना कर दी जो शासन के नियमों के विपरीत है, इसलिए उन्हें निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई जाए। साथ ही मंत्री ने जनवरी 2025 में किए गए ऐसे पदांकन की सूची भी मांगी है।
प्रतिनियुक्ति पर ऐसे-ऐसे अफसर
शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति का कारोबार कुछ इस तरह चल रहा है कि एक अफसर के पास तीन-तीन विभागों का चार्ज है। राज्य ओपन बोर्ड के संचालक प्रभात राज तिवारी ऐसे अफसरों में शामिल हैं। तिवारी पिछले नौ साल से बोर्ड में संचालक के रूप में काम कर रहे हैं। इनके पास योग केंद्र और पतंजलि संस्कृति संस्थान के संचालक का भी जिम्मा है। ब्यूरोक्रेसी की मिलीभगत से तिवारी यहां लंबे समय से जमे हैं।