जबलपुर। वेटरनरी कॉलेज के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड फॉरेंसिक हेल्थ में तीन दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है। इसमें भारत समेत विदेशों से वन्य प्राणी विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डॉ. अनुपम शाह और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि सम्मेलन में जंगली जानवरों की बीमारियों और उनकी निगरानी की नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है। खासतौर पर केनाइन डिस्टेंपर नाम की बीमारी पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे जानवरों को बचाने के लिए एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
मध्य प्रदेश के चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट शुभरंजन सेन ने चीता पुनर्वास पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो में अच्छी तरह बसाया गया है। अब इन्हें गांधी सागर और आगे नौरादेही में भी शिफ्ट किया जाएगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में देश का पहला वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बन रहा है, जो अलग-अलग टाइगर रिजर्व को जोड़ेगा।
बाघ-चीता को एक ही जंगल में रखने की योजना
शुभरंजन सेन ने बताया कि भविष्य में बाघ और चीता को एक ही जंगल में रखने की योजना है, जैसा पहले भी देखा गया है जब शेर, चीता और तेंदुआ एक साथ रहते थे।
सम्मेलन में कीनिया से डॉ. आइजक, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से डॉ. क्रिल और डॉ. निकीटन जैसे विशेषज्ञ शामिल हुए। भारत वन्यजीव, पालतू जानवर और इंसानों के स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर देखने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।