उज्जैन। धार्मिक शहर उज्जैन में मोबाइल पर रील देखने और गेम खेलने की लत छुड़ाने के लिए अब लोग भगवान का सहारा ले रहे हैं। चिंतामन मंदिर परिसर में स्थित विघ्नहर्ता गणेश मंदिर में बच्चों की बुरी लत छुड़ाने के लिए पुजारी संकल्प दिला रहे हैं। खास बात ये है कि कई बच्चे यहां संकल्प लेने के बाद मोबाइल पर गेम खेलने की आदत छोड़ भी चुके हैं।
दरअसल नशे की तरह ही बच्चे मोबाइल के आदी होते जा रहे हैं। इसका बुरा असर उनके व्यवहार पर पड़ने लगा है। माता-पिता ने जरा सी जिद करने पर जिस मोबाइल को खिलौना समझ बच्चों को थमाया था, अब वही उनके लिए तनाव का कारण बनता जा रहा है। मोबाइल की लत से दूर रखने के लिए तरह-तरह के जतन के बीच भगवान का सहारा लिया जा रहा है, अभिभावक बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए पढ़ाई और खेल में व्यस्त कर रहे हैं, तो इस बीच धार्मिक उपाय भी कर रहे हैं।
उज्जैन शहर से करीब 6 किमी दूर प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर परिसर में लक्ष्मण बावड़ी के पास स्थित विघ्नहर्ता गणेश मंदिर में बच्चे मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए संकल्प ले रहे हैं। मंदिर के पुजारी ईश्वर शर्मा ने बताया कि कई लोग इस मंदिर में अपनी मुराद लेकर आते थे, लेकिन कुछ समय से लोगों ने मुझे कहा कि हमारे बच्चे को मोबाइल की लत है और वो छोड़ता नहीं है। जिसके बाद हमने बच्चों को संकल्प दिलाना शुरू किया, कुछ दिन बाद उन्हीं अभिभावकों ने फोन पर मुझे बताया कि आपके संकल्प ने मोबाइल पर गेम खेलना और दिन भर मोबाइल पर रील देखना बंद कर दिया है। अब तक करीब 200 बच्चों का मोबाइल संकल्प से छुड़वा चुका हूं।
ऐसे होता है संकल्प-
पुजारी ईश्वर शर्मा ने बताया कि हम तो सिर्फ मंदिर में लक्ष्मण बावड़ी के समीप विराजमान विघ्नहर्ता गणेश के सामने बच्चों को बैठाते हैं, उसी से संकल्प दोहराते हैं फिर ये मूषक के कान में अच्छे से पढ़ाई की बात बुलवाते हैं। कई माता-पिता बच्चों को तीन से पांच बुधवार लेकर आ रहे हैं और संकल्प करवा रहे हैं। यहां आने पर बच्चों में ये विकृति में कमी आ रही है, जो अभिभावक बच्चों को लेकर मंदिर आते हैं उनको भगवान गणेश के सामने खड़े कर संकल्प दिलवाते हैं जो इस प्रकार है।
ष्हे विघ्नहर्ता हमको अच्छी बुद्धि देना, विद्या देना, मैं मम्मी-पापा दादा-दादी और नाना-नानी सहित सभी बड़ों की बात मानूंगा। मैं जिद नहीं करूंगा, मैं मोबाइल पर गेम नहीं खेलूंगा, बड़ों की बात सुनूंगा।ष्
ऐसे शुरू हुआ सिलसिला-
पुजारी ईश्वर शर्मा बताते हैं कि देशभर से श्रद्धालु मंदिर में भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। यहां आने वाले कुछ लोग दर्शन करते समय अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की बात करते थे। , तभी से लगा की मंदिर में बच्चों को मोबाइल से दूर रहने का संकल्प दिलवाना चाहिए और करीब एक साल से ये परम्परा चल निकली और जिन लोगों को पता चलता है और जो बच्चों को मोबाइल से दूर रखना चाहते हैं वो अभिभावक अपने बच्चों को लेकर मंदिर पहुंच जाते हैं।
मनोचिकित्सक बोले धार्मिक भावना जोड़कर लत छुड़ाने का अच्छा प्रयास-
मनोचिकित्सक डॉ. पराग ढोबले ने बताया कि 20 प्रतिशत अभिभावक बच्चों की मोबाइल संबंधी लत को लेकर आ रहे हैं। अधिकांश बच्चे मोबाइल पर ऑनलाइन गेम के ज्यादा एडिक्ट हो रहे हैं। मनोवैज्ञानिक तरीके से ऐसे बच्चों का इलाज कर रहे हैं। धार्मिक स्तर पर भी बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए उन्हें मोटिवेट किया जा रहा है, यह भी एक अच्छा प्रयास है।
देशभर से श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं-
मंदिर की मान्यता है कि त्रेता युग में 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ने उज्जैन के शिप्रा नदी किनारे राम घाट पर दशरथ जी का पिंडदान किया और उसके बाद दक्षिण दिशा में चलते हुए मंदिर के पास आकर वटवृक्ष के नीचे आराम कर ही रहे थे कि सीता मैया को पूजन करने का मन किया इस दौरान वटवृक्ष के पास भगवान चिंतामन, इच्छामन और सिद्धिविनायक की मूर्ति देख उन्होंने प्रथम पूजन इस मंदिर में किया था।
हालांकि इस दौरान जलाभिषेक करने के लिए जब उन्हें जल नहीं मिला तो लक्ष्मण जी अपने बाण से मंदिर के सामने ही बाणगंगा के रूप में जल को पाताल से जमीन पर ले आए थे तभी से यहां पर बावड़ी का नाम बाणगंगा और लक्ष्मण बावड़ी रखा गया था। इसी बावड़ी के पास विराजित है विघ्नहर्ता गणेश मंदिर।