इन्दौर। सिकल सेल एनीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जो प्रायः आदिवासी समाज में होती है। इसमें मरीज के पैरों और छाती में दर्द होता है, पेट में सूजन आ जाती है और अधिक गंभीर स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बाद मध्यप्रदेश देश का ऐसा तीसरा राज्य है जहां सिकल सेल एनीमिया के सर्वाधिक प्रभावित मरीज है। यह जानकारी आज यहां संभागायुक्त दीपक सिंह ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन की बैठक में दी गई। बैठक में उप संचालक राज्य हिमोग्लोबिन निकाय डॉ. रूबी खान, संयुक्त आयुक्त विकास डीएस रणदा, क्षेत्रीय संचालक डॉ. शोजी जोसफ, वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. पूनम गडरिया, एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव सहित संभाग के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में संभागायुक्त सिंह ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया का उन्मुलन राज्य शासन की प्राथमिकताओं में से एक है। इस बीमारी की रोकथाम में जागरूकता और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिये मालवी, निमाड़ी आदि स्थानीय भाषाओं में सचित्र पुस्तके प्रकाशित की जाये। जागरूकता बढ़ाने के लिये आदिवासी क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया जाये। संभाग के सभी जिलों में कार्यशाला आयोजित की जाये। संभाग के सभी हितग्राहियों की स्क्रीनिंग के साथ उनकी काउंसिलिंग की जाये।
संभागायुक्त सिंह ने कहा कि एनीमिया, हिमोफिलिया, थैलीसिमिया और सिकल सेल एनीमिया आदि बीमारियों के निदान में मरीज को रक्त की अधिक आवश्यकता लगती है इसलिये संभाग के सभी जिलों में ब्लाक स्तर पर समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किये जाये। संभागायुक्त सिंह ने सभी अधिकारियों को संकल्प दिलाया कि वे मिलकर सिकल सेल रोगों को जड़ से मिटाने के लिये हर संभव प्रयास करेंगे और ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जहां हर बच्चा दर्द और पीड़ा से मुक्त होकर खुशहाल जीवन जी सकें।
डॉ. रूबी खान ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया रक्त से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसका पता यदि समय रहते लगा लिया जाये तो हम संभावित मरीजों को इस बीमारी से बचा सकते है। संभाग के सभी हितग्राहियों की जांच की जाये और इस कार्य में आशा कार्यकर्ता का पूरा सहयोग लिया जाये। जो हितग्राही सिकल सेल एनीमिया पॉजिटिव पाया जाये उसका चिन्हित कर तुरंत उसका इलाज शुरू कर दिया जाये। गर्भवत्ती महिलाओं की जांच पहली तिमाही में ही करा ली जाये। गर्भवत्ती महिला शिशु के स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक रहे। सिकल सेल एनीमिया के उन्मुलन हेतु मरीजों को फोलिक एसिड और हायड्रोफोलिक की दवाईयां दी जाये , साथ ही उन्हें न्यूमोकोकल के टीके भी लगाये जाये। उन्होंने बताया कि संभाग में माइल्ड मॉडरेट एवं सिवियर एनीमिया का प्रतिशत अधिक है। जेनेटिक कार्ड के मिलान के बाद ही विवाह करें।