इंदौर। नगर निगम के पास कहने को डेढ़ सौ इंजीनियरों (सिविल कामों के एक्सपर्ट) की भारी-भरकम फौज है। इनकी पगार पर ही हर माह 75 लाख से ज्यादा खर्च होते हैं, वहीं 10-15 करोड़ रुपए निगम कंसल्टेंसी पर खर्च करता है, इसके बाद भी निर्माण कार्यों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं है। यही कारण है कि सिर्फ 1 इंच बारिश में शहर डूबने लगता है। मंगलवार को लगातार तीसरे दिन यही हुआ। महज 1 इंच बारिश में सड़कें तालाब बन गईं। कहीं खराब इंजीनियरिंग तो कहीं बेतरतीब निर्माण कार्यों ने शहर की फजीहत कर दी।
खजराना चौराहे पर आईडीए ने फ्लायओवर बनाया, लेकिन पानी निकासी का ध्यान नहीं रखा गया। इस कारण घुटनों तक पानी जमा हो गया। आनंद मोहन माथुर सभागृह के आसपास स्टॉर्म वाटर लाइन भी डली है, लेकिन वहां भी पानी जमा हो गया। कारण यह कि शहर में कहीं भी स्टॉर्म वाटर लाइन और चौंबर की सफाई नहीं हुई है। हैरत की बात ये है कि जब प्री मानसून एक्टिविटी शुरू हो जाती है, तब 80 लाख से चौंबर और स्टॉर्म लाइन सफाई के टेंडर बुलाए गए हैं।
निगम सड़कें बना रहा, लेकिन ढलान पर ध्यान नहीं
विजय नगर पर श्रीकृष्ण दूध डेयरी के पास वाली रोड, अनुराग नगर क्षेत्र में सड़क और फुटपाथ का लेवल समान नहीं होने से लोगों के घरों में पानी घुसा।
वार्ड 4 की गोविंद कॉलोनी में नई सड़क बना दी। सड़क की ऊंचाई घरों से ज्यादा है। पानी घर में घुस जाता है।
रामचंद्र नगर एक्सटेंशन में घरों के लेवल पर सड़कें बना दी, फिर बेतरतीब स्पीड ब्रेकर बना दिए। इससे बारिश का पानी नहीं निकल सका और घरों में घुस गया।
गोयल नगर एक्सटेंशन में भी सड़कों पर घुटनों तक पानी भर जाता है। वजह यह है कि रिंग रोड पर स्टॉर्म वाटर लाइन नहीं है। महादेव नगर, वंदना नगर सहित आसपास की कॉलोनियों में स्टॉर्म वाटर लाइन नहीं डली है।
लोधीपुरा स्मार्ट सिटी एरिया में आता है। यहां भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष कैलाश शर्मा परिवार के साथ घर का पानी निकालते नजर आए। उन्होंने बताया, तीन साल से पानी भरने लगा है। छोटी-छोटी पाइप लाइन डाल दी है, जिनसे बारिश का सारा पानी नहीं निकल पाता।
एक साथ बहुत अधिक पानी गिरता है, तो निकासी में थोड़ा समय लगता है
‘तीन दिन से रुक-रुककर मूसलधार बारिश हुई है। इससे कुछ जगहों पर अस्थायी जलभराव की स्थिति बनी। जब एक साथ बहुत अधिक पानी गिरता है, तो निकासी में थोड़ा समय लगता है। ड्रेनेज चौंबर्स की सफाई पूरे साल चलती रहती है। स्टॉर्म वाटर लाइन की सफाई का काम हम अप्रैल-मई में करते हैं। - पुष्यमित्र भार्गव, महापौर
लाइन मेंटेनेंस 4 साल से बंद, इसीलिए बिजली व्यवस्था चौपट
इंदौर बारिश की बूंदें यूं तो मन प्रसन्न कर देती हैं, लेकिन पिछले तीन दिन से बारिश मानो खौफ बन गई है। इसकी असल वजह है- बिजली कंपनी। लोग इसी दहशत में हैं कि पानी गिरते ही बत्ती गुल हो जाएगी। फिर कब आएगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं।
दरअसल, देश की नंबर एक बिजली कंपनी का तमगा हासिल कर चुकी पश्चिम क्षेत्र कंपनी ने तीन-चार साल से अपना बुनियादी काम यानी एचटी और एलटी लाइनों का मेंटेनेंस ही बंद कर दिया है। कंपनी का फोकस केवल बिल वसूली और कनेक्शन काटने पर है। शहर में 30 जोन हैं। हर जोन पर 15-20 स्थायी लाइनमैन होना चाहिए। स्थिति यह है कि हर जोन पर 2-3 ही स्थाईकर्मी बचे हैं। वह भी रिटायरमेंट की कगार पर हैं। उनका पोल पर चढ़कर काम करना मुश्किल है। वहीं जिन आउटसोर्स लाइनमैन को रखा है, वे प्रशिक्षित नहीं हैं। यही सबसे बड़ी वजह है कि फॉल्ट होने पर जहां एक घंटे में सप्लाय नार्मल हो जाना चाहिए, वहां 3-4 घंटे लग रहे हैं।