खरगोन। समूचे विश्व में केवल भारत भूमि ऐसी भूमि है, जहां उपासना होती है, बाकी सारी भूमि पर केवल वासना है। यही कारण है कि देवता भी यहां जन्म लेने को तरसते है। भगवान के 24 अवतार हुए है और वह सभी अवतार केवल भारत भूमि पर हुए, किसी अन्य देश में नही। उक्त उद्गार अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक डॉ. श्याम सुंदर पाराशर ने भगवान के विभिन्न अवतारों की कथा का मनोहारी वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान के सारे जन्म यहां हुए तो प्रश्न उठता है कि भगवान को भारतीय क्यों नही कहा जाता, जगन्नाथ क्यों कहा जाता है। भगवान को इसलिए जगन्नाथ कहा जाता है क्योंकि समूचा संसार भगवान का शरीर है और भारत भूमि उनका हृदय है। यहां धर्म है, जो भगवान की धड़कन है। यहां धर्माचरण के लिए ही जीवों का जन्म हुआ है।
आतंकवादी उस सांप की तरह जो पोषित करने वाले के सर्वनाश का कारण बनते है
डॉ. पाराशर ने श्री हरि और ब्रह्माजी संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि ब्रह्माजी ने राजा बलि को वरदान दिया था, जिससे उसने समूची धरती, गगन पर अपनी सत्ता जमा ली थी। इस पर श्री हरि ने कहा कहा कि सांप को पालोगे तो वह तुम्हे ही डंसेगा। इसी तरह पाकिस्तान पोषित आतंकवादी है जो अपने ही देश के लिए सर्वनाश करने का कारण बन रहे है।