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November 15, 2025, 4:27 pm
BIG NEWS : मालवा के मंदसौर में ढोल-ढमाकों के साथ निकाली गधों की रैली, मंदसौर मास्टर प्लान 2041 का विरोध, बोले- जनता की आवश्यकताओं, जमीनी हकीकत और जनभावनाओं को किया नजरअंदाज, पढ़े रवि पोरवाल की खबर 

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मंदसौर। प्रशासन द्वारा जारी मास्टर प्लान 2041 को लेकर शहर में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पहले कुमावत समाज और कांग्रेस ने खुलकर आपत्ति दर्ज कराई थी। अब शनिवार को शहर में एक अनोखी “गधों की रैली” निकालकर विरोध जताया गया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। 15 गधों के साथ व्यंग्यात्मक प्रदर्शन कर मास्टर प्लान को जनविरोधी बताया और इसमें जनहितैषी सुधार करने की मांग की गई। 

ढोल-ढमाके के साथ निकली रैली-
शनिवार दोपहर खानपुरा शनि मंदिर से करीब 15 गधों की रैली ढोल-ढमाकों के साथ रवाना हुई। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गांधी चौराहे तक पहुंची। जहां इसका समापन सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के रूप में किया गया।

गधों पर लगे तंज भरे पोस्टर- ‘मंदसौर का मास्टर प्लान मैंने बनाया’
रैली में शामिल प्रत्येक गधे के ऊपर व्यंग्यात्मक पोस्टर लगाए गए थे, जिन पर लिखा था
“मंदसौर का मास्टर प्लान मैंने बनाया।” विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान जनता की आवश्यकताओं, जमीनी हकीकत और जनभावनाओं को नजरअंदाज करते हुए बनाया गया है। आयोजकों ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्लान सोच-समझ वाला नहीं, बल्कि गधेपन का परिचय देता है।

गधे की मालिक बोली- हमें नहीं पता क्या लिखा है
गधों की मालिक रामकन्या बाई ने बताया “हमें पता नहीं गधों पर क्या लिखा है। हमें मजदूरी देकर कहा गया था कि खानपुरा से गांधी चौराहा तक चलना है। हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। 

पहले भी उठा है जोरदार विरोध-
कुछ दिन पहले कुमावत समाज ने गांधी चौराहे पर दोपहर का धरना एवं रैली निकालकर मास्टर प्लान को निरस्त करने की मांग की थी। कांग्रेस भी औपचारिक रूप से इसका विरोध दर्ज करा चुकी है।

विरोध की मुख्य वजहें-
1. 100 फीट चौड़ी सड़क से यशनगर और मेघदूत नगर प्रभावित-
सुशासन भवन के पास प्रस्तावित 100 फीट चौड़ी सड़क से इन दोनों कॉलोनियों के कई मकान व भूखंड प्रभावित होंगे। क्षेत्रवासी इसे अव्यावहारिक बता रहे हैं।

2. केशवकुंज क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट घोषित करना अनुचित-
स्थानीय लोगों के अनुसार केशवकुंज पूरी तरह विकसित आवासीय क्षेत्र है। इसे ग्रीन बेल्ट घोषित करना न तो व्यावहारिक है और न ही जनहित में।

3. नरसिंहपुरा क्षेत्र की कुमावत समाज की जमीन को कृषि श्रेणी में रखना-
लोगों का कहना है कि रेवासदेवड़ा रोड तेज़ी से आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र में बदल रहा है, ऐसे में आसपास की जमीनों को कृषि श्रेणी में रखना तर्कसंगत नहीं है। जमीन को आवासीय श्रेणी में शामिल करने की मांग की जा रही है।

4. तैलिया तालाब का संरक्षण प्लान में स्पष्ट नहीं- 
स्थानीय निवासियों ने तालाब संरक्षण के लिए ठोस प्रावधान जोड़ने की मांग की है, ताकि भविष्य में अतिक्रमण व जलसंकट से बचा जा सके।

5. 32 गांवों के निवेश क्षेत्र का समग्र विकास नजरअंदाज- 
मास्टर प्लान के तहत 32 गांव शामिल हैं, लेकिन विरोधकर्ताओं का आरोप है कि इन ग्रामीण व निवेश क्षेत्रों के समग्र विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

6. नालछा गांव में नया बस स्टैंड नगर सीमा से बहुत दूर-
लोगों का कहना है कि नया बस स्टैंड शहर से काफी दूरी पर प्रस्तावित है, जिससे आम नागरिक और यात्री असुविधा महसूस करेंगे। इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है।

जनहित सर्वाेपरि- असंगत प्रावधान हटाए जाएं
विरोध जताने वालों ने कहा कि मास्टर प्लान 2041 लागू करने से पहले जनता की राय को प्राथमिकता दी जाए। जनभावनाओं के विपरीत लिए गए निर्णयों को संशोधित किया जाए और प्लान में व्यावहारिक, जनहितैषी सुधार किए जाएं।

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