मनासा। शहर में सामने आए जीबीएस (गिलियन-बैरे सिंड्रोम) के मामलों को लेकर अफवाहें और डर फैलने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है, बल्कि अक्सर किसी संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी से होने वाली न्यूरोलॉजिकल स्थिति है।
डॉक्टरों का स्पष्ट निर्देश है कि घबराने की बजाय समय पर इलाज चालू करना जीवन बचा सकता है। कमजोर हाथ-पैर, सुन्नपन, चलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा केंद्रों, जैसे कि सिविल अस्पताल, में संपर्क करना चाहिए।
अस्पताल और डॉक्टर ही इस बीमारी का सबसे भरोसेमंद सहारा हैं। झाड़-फूँक, मंत्र-तंत्र या जादू से समय न गंवाएँ। सही उपचार ही बीमारी को बढ़ने से रोकता है।
हौसला और विश्वास भी इलाज का हिस्सा हैं। मरीज के साथ सहानुभूति और समर्थन देना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना समय पर उपचार। डर और घबराहट बीमारी से भी ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।
विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि सावधानी बरतें, डर को बढ़ावा न दें, और स्वास्थ्य केंद्रों के निर्देशों का पालन करें।
संक्षेप में-
मनासा जीबीएस से नहीं टूटेगा अगर शहर के लोग डर से नहीं, बल्कि भरोसे, हौसले और समय पर इलाज से इसका सामना करेंगे।